युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद Part 5

dr. j k garg
विवेकानन्दजी के शिष्यों के अनुसार जीवन के अंतिम दिन यानि 4 जुलाई 1902 को भी उन्होंने अपनी ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला था उन्होंने उस दिन घंटों तक ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेद कर महासमाधि ले ली। बेलूर में गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनकी अंत्येष्टिकी गयी। इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंसका सोलह वर्ष पूर्व अन्तिम संस्कार हुआ था। उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक मन्दिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानंद तथा उनके गुरु रामकृष्ण के सन्देशों के प्रचार के लिये 130 से अधिक केन्द्रों की स्थापना की। परम पूजनीय स्वामी जी के 158वें जन्म दिन के पावन अवसर पर हम सभी को उनके दूवारा बतलाये गये मार्ग का अनुसरण करने का संकल्प लेना चाहिये |

स्वामी विवेकानंद जी के 158वें जन्म दिन पर सभी भारतवासियों को हार्दिक बधाईयाँ और सुभकामनायें

प्रस्तुति करण एवं सकलंकर्ता—डा जे. के. गर्ग

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