शहीद दिवस (Martyrs Day) part 3

j k garg
पिछले कई वर्षों से तो ऐसा लगता है कि हम 30 जनवरी को शहीद दिवस को मनाने की केवल औपचारिकता ही निभा रहे हैं | एक तरफ तो हम बापूजी के नाम की दुहाई देकर सत्ता प्राप्त करते है वहीं गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को सच्चा देशभक्त बताते हुए बापू की देश भक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्हें कठघरें में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास करते हुए संसद के सदस्य तक बन जाते हैं | सार्वजनिक कार्यक्रमों में बापूजी को गाली गलोच देकर अपने को आप को गोरान्वित महसूस करते हैं | दुःख तो इस बात का है कि कुछ लोग तालिया बजा कर उनका उत्साह वर्धन करते हैं जबकि अन्य बापू और देश भक्तों के खिलाफ अनर्गल बाते सुन कर भी मोन धारण कर लेते हैं | ऐसा सब कुछ होता देख कर महसूस होता है कि यह सबसमय की बलिहारी ही है|

डा. जे.के.गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कालेज शिक्षा जयपुर

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