बीकानेर, 6 जुलाई। खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सागर सूरिश्वर के शिष्य मुनिश्री मनित प्रभ सागर ने गुरुवार को दस्साणी चौक के पास की धनराज ढढ्ढा की कोटड़ी में प्रवचन में कहा कि चातुर्मास में चातुर्मास में सम्यक् ज्ञान, दर्शन व चारित्र की आराधना व साधना करें।
उन्होंने कहा कि जन्म लेना, खाना-पीना और म जाना जीवन नहीं है। ज्ञान, बोध व चेतना से जीवन की सार्थकता को समझें। जीवन को कषायों, पापकर्मों से बचाएं । ज्ञान की आराधना की ललक, ध्यान व रूचि होने से ही उसे ग्रहण किया जा सकता है। जीवन के उपवन में ज्ञान के पुष्प खिलाने का प्रयास करें।
खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सागर सूरिश्वर के सान्निध्य में शुक्रवार को चातुर्मासिक चतुर्दशी से चातुर्मास के नियम, अनुष्ठान तथा प्रवचन शुरू होंगे।