(अटलजी के 93वें जन्म दिवस पर समस्त भारतियों दुवारा उनके शतायु होने एवं स्वस्थ रहने के कामना के साथ) Part 3

सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा जिसमे उन्हें पराजय मिली, लेकिन उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया एवं उन्होंने सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश से जनसंघ प्रत्याशी के रूप में पुनः चुनाव लड़ा जिसमें विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में वाजपेयीजी सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे उन्होंने अपने दायित्व का निर्वाह सफलतापूर्वक किया । अटलजी पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर देश को एवं हिन्दी को गौरवान्वित किया था।
1980 में जनता पार्टी से दोहरी सदस्यता के मामले के कारण जनसंघ के सदस्य जनता पार्टी से अलग हो गये और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की। 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। सन् 2004 में अपने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भयंकर गर्मी में वाजपेयीजी ने इण्डिया शाइनिंग के नारे के साथ लोकसभा के चुनाव करवाये जिसमें भा०ज०पा० के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन को विजय नहीं मिल सकी थी |