शाहपुरा में फूलड़ोल महोत्सव का समापन
भीलवाड़ा, 25 मार्च / रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक फूलड़ोल महोत्सव का समापन सोमवार को जिले के शाहपुरा में अपरान्ह में बारादरी में संतो व हजारों भक्तों की उपस्थिति में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के चार्तुमास की घोषणा के साथ हुआ। आचार्य श्री रामदयालजी महाराज का आगामी चार्तुमास अहमदाबाद में होगा। इससे पूर्व चार्तुमास की विनती करने के लिए विभिन्न शहरों की अरजियों का वाचन संतों द्वारा किया गया। आचार्यश्री द्वारा चार्तुमास की घोषणा होते ही अहमदाबाद के भक्तजनों में उत्साह का संचार व्याप्त हो गया तथा उन्होनें रामनिवास धाम परिसर में संत जगवल्लभराम महाराज की अगुवाई में शोभायात्रा निकाल कर अपनी खुशियों का इजहार किया। महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव के अंर्तगत शोभायात्रा में सभी को गुलाल से सरोबार कर दिया। इस दौरान आचार्यश्री ने अगले वर्ष 2 फरवरी से 8 फरवरी तक सोड़ा में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव में अधिकाधिक भक्तों से शामिल होने का आव्हान किया।
सोमवार को सांसद सुभाष बहेड़िया, जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने शाहपुरा पहुंच कर आचार्यश्री से आर्शिवाद प्राप्त किया।
उल्लैखनीय है कि इस दौरान बारादरी में भक्तजनों का अनुनय विनय करने के दौरान उनके भावो में करूणा दिखने लगी। रविवार को रात्रि प्रवचन सभा में भी इस प्रकार की अर्जियों को अप्रत्यक्ष रूप से पेश कर माहौल बनाया गया था पर तब आचार्यश्री ने सभी को शांत कर परंपरा अनुसार कार्य व निर्णय करने पर जोर दिया।
फूलडोल महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को भी रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक नया बाजार स्थित राममेडिया से रंग पंचमी पर आद्याचार्य की अणभैवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। सोमवार को बारादरी में अपरान्ह में ठीक सवा बारह बजे आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने राम नाम सुमिरन करते हुए अपना चार्तुमास करने की घोषणा की।
इस बीच रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक उत्सव में भाग लेने के लिए पहुंच रहे सभी भक्त जनों के लिए आवास व भोजन की व्यवस्था रामनिवास धाम परिसर में की गई । सभी यात्रियों के लिए भोजन की निशुल्क व्यवस्था की गई है। महोत्सव के समापन की घोषणा के साथ ही भक्त जनों की वापसी शुरू हो गई है।
बारादरी में रहा आकर्षक नजारा- चार्तुमास की घोषणा के ठीक पहले बारादरी में आचार्यश्री से अनुनय विनय करने के लिए भक्तजनों का नजारा आकर्षक दिखा। हर कोई करूणा भाव से अरजी पेश कर भक्ति भाव का प्रदर्शन कर रहा था।
राजनीति पर धर्म का अंकुश हो -आचार्यश्री
भीलवाड़ा, 25 मार्च / रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगदगुरु आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि राम व राष्ट्र के लिए समर्पण का होना अनिवार्य है। समर्पण के लिए भक्ति होनी चाहिए। उन्होनें देश की राजनीति में नैतिक गिरावट पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति पर धर्म का अंकुश हो। सत्ता व धर्मध्वजा के समन्वय से ही आंतकवाद से छुटकारा पाया जा सकता है।
जिले के शाहपुरा में चार्तुमास की घोषणा से पूर्व सोमवार को बारादरी में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव के अंर्तगत अंतिम विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय अपने उदेश्यों के अनुरूप मानव सेवा, गौसेवा, चिकित्सा व शिक्षा सेवा सहित अन्य पुनित कार्य कर रहा है। आचार्यश्री ने अगले वर्ष 2 फरवरी से 8 फरवरी तक सोड़ा में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव में अधिकाधिक भक्तों से शामिल होने का आव्हान किया।
संप्रदाय के आद्याचार्य का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि रामधर्म को छोड़ कर कोई भागे नहीं। संत व संप्रदाय के सानिध्य में रह कर कोई भी पक्षपात रहित मानवता से कार्य करें तो ही राष्ट्र सुरक्षित रह पायेगा। शाहपुरा की धरा को तपोस्थली बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि यहां आकर अहां की माटी अपने ललाट पर लगाने वाला ही धन्य हो जाता है। यह सब आद्याचार्य का ही पुण्य प्रताप है।
आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसद से लेकर सड़क तक व्याप्त आंतकवाद की काली छाया के कोहरे को हटाने के लिए राम नाम स्मरण किया जाना जरूरी है। ऐसा किये बिना भवसागर की वैतरणी को पार करना कठिन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म वहीं है जो अक्षय है। राम, राष्ट्र के अक्षय संबंध पर विचार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि अक्षय धर्म आत्म धर्म है। हमारा सनातन धर्म संपूर्ण विश्व में मानवता का संदेश दे रहा है। विभिन्न प्रेरक प्रसंगो का जिर्क करते हुए उन्होंने कहा कि मिथ्या से अहंकार का भाव पैदा होता है। अहंकार से कौरवों तक का सफाया हो गया था। गरीब में अहम न होने से वो सुखी है। विनम्रता से सब कुछ पाया जा सकता है।
भारतीय सनातन संस्कृति और महाप्रभु रामचरणजी महाराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश ड़ालते हुए आचार्यश्री कहा कि किसी भी धर्म या मजहब की किसी भी रूप में निंदा करना नरक में जाने के समान है। राष्ट्र का व्यक्ति राष्ट्र में ही आग लगा रहे है। ऐसी विषम परिस्थितियों में हमें संयम से काम लेना होगा।
फुलडोल महोत्सव-अहमदाबाद के भक्तों ने निकाली गोटकाजी की शोभायात्रा
भीलवाड़ा, 25 मार्च / रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के अपना चार्तुमास अहमदाबाद में करने की घोषणा के पश्चात वहां के भक्तजनों को स्वीकृति स्वरूप आचार्यश्री द्वारा दिए गए गोटकाजी की रामनिवास धाम में शोभायात्रा निकाली।
बारादरी में आयोजित समारोह में आचार्यश्री द्वारा गोटकाजी प्रदान करने के उपरांत संत जगवल्लभराम महाराज की अगुवाई में गोटकाजी को सिर पर रखकर भक्तजनों ने सुरजपोल से गुलाल अबीर उड़ाते हुए शोभायात्रा निकाली। भक्तों ने एक दूसरे को गुलाल लगा कर खुशी का इजहार किया तथा मुख्यद्वार, रामशाला भवन होते हुए शोभायात्रा रामकोठी अहमदाबाद हाॅल में पहुंची तथा बाद में सभी भक्तों ने आचार्यश्री को प्रणाम कर चार्तुमास को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।
शाहपुरा में फूलडोल शोभायात्रा का स्वागत
शाहपुरा जिला भीलवाड़ा
रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक फूलडोल महोत्सव के समापन पर सोमवार को शाहपुरा में निकाली गयी शोभायात्रा सांप्रदायिक सद्भाव की नई मिसाल बन गयी। गंगा जमनी संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए आम प्रत्येक समाज की ओर से समाज के प्रतिनिधियों ने त्रिमुर्ति चैराहे पर शानदार जलसे का आयोजन कर फूलडोल शोभायात्रा का पुष्पवर्षा से न केवल स्वागत किया। शाहपुरा में पिछले 253 वर्षो से चले आ रहे फूलडोल महोत्सव को हर तरफ उतसाह का वातावरण दिखता है। त्रिमुर्ति चैराहा के पास कोली समाज की ओर से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। पेट्रोल पंप के बाहर मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने भी शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की।
फूलड़ोल महोत्सव में आस्था का उमड़ा ज्वार
शाहपुरा जिला भीलवाड़ा
हर तरफ राम नाम का जयघोष तथा राम नाम का जप। रामनिवास धाम सोमवार को एक समुद्र के रूप में ऐसे दिख रहा था मानो यहां आस्था का ज्वर उमड़ पड़ा। देश विदेश के विभिन्न अंचलों से सोमवार को करीब 30 हजार भक्त जनों ने रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिकोत्सव फुलडोल महोत्सव में अपनी उपस्थिति दी। आस पास के गावों से भी हजारों लोग महोत्सव में पहुंचे। शाहपुरा के ग्रामीण अंचलों से भी हजारों की तादाद में यहां पहुंच कर नगर पालिका द्वारा लगाये गये अस्थाई मेले में आई डोलरों, चकरी का आनंद लिया। आस्था के ज्वार में भक्तों का सैलाब राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड के अलावा सिंगापुर व वियतनाम से पहुंचा। आज अंतिम चार्तुमास की घोषणा होते ही आस्था का ज्वार नीचे उतरने लगा तथा सैलाब धीरे धीरे छंटने लगा।
मूलचन्द पेसवानी