जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य हो सकता है- संगम मति माताजी

विद्यासागर तपोवन छतरी योजना में चल रहे पावन चतुर्मास के तहत प्रातः कालीन प्रवचन सभा में संगम मति माताजी ने कहा वैराग्य जब होना होता है तो समय और काल नहीं देखता जीवन के किसी भी क्षण में किसी भी पल में इंसान को वैराग्य हो सकता है जब संसार से विरक्ति होती है तभी वैराग्य होता है वैराग्य के पीछे धर्म के प्रति श्रद्धा समर्पण छुपा होता है
मानव जीवन परिस्थितियों के अनुसार चलता है लेकिन वैराग्य की ओर जाता हुआ इंसान सब परिस्थितियों को पार कर लेता है
धर्म के प्रति श्रद्धा और समर्पण नैतिक मूल्यों को उच्चता की ओर ले जाता है और जब श्रद्धा समर्पण उच्च हो जाती है अपने आप सांसारिक बंधनों से यह शरीर मुक्त होना चाहता है यह आत्मा मुक्त होना चाहती है वही वैराग्य की उत्पत्ति होती है
प्रातः कालीन प्रवचन में आज का दीप प्रज्वलन महेश सुयोग गंगवाल परिवार ने किया रात्रि में 8:00 से 9:00 तक रिद्धि सिद्धि मंत्र आराधना की गई सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंत्र की आराधना की

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