*इण्डिया इंटरनेशनल म्यूजिक लवर्स सोसायटी ने महान गायक मुकेश जी के गाए गीतों से दी फिल्म निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी , संगीतकार सपन चक्रवती और सावनकुमार टाक और आनंदजी जी को भी स्वरांजली*
अजमेर। आज मुकेश जी की पुण्य स्मृति पर इण्डिया इंटरनेशनल म्यूजिक लवर्स सोसायटी ने नसीराबाद रोड स्थित मुकुंद गार्डन में फिल्म निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की
पुण्यतिथि के साथ साथ सपन चक्रवती और सावनकुमार टाक और आनंदजी जी को भी उनके संगीत सयोंजन में मुकेश जी के गाए गीतों से याद किया ।
सदस्यों ने मिले सुर मेरा तुम्हारा की परंपरा को बढ़ाते हुए संगीत की महफ़िल में स्वरांजली देते हुए सभी गायकों की प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय, स्तरीय, कर्णप्रीय रही जिनमें शकील खान और कमरजहाॅ मेरा प्यार भी तू यह बहार भी तू है, (युगल गीत) , रश्मि मिश्रा मुबारक हो सबको समां ये सुहाना फरहान और देवी सिंह कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, योगेश गौर झूमती चली हवा याद आ गया कोई, रजनीश मैसी तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी , कुंजबिहारीलाल ने व॔दना मिश्रा के साथ तेरे होठो के दो फूल प्यारे प्यारे और उषा मित्तल के साथ युग युग से ये गीत मिलन के गाते रहेगें , डॉ लाल थदानी मैं ढूंढता हूं जिनको ख्वाबों में डॉ और गीतांजली के साथ क्या खूब लगती हो युगल गीत गाकर प्रभावित किया , वी के पाठक हमने तुझसे प्यार किया है जितना, निर्मल सिंह परिहार डम डम डीगा डीगा, डॉ विकास मनीषा सक्सेना किसी राह में किसी मोड़ पर, और रेखा मित्तल के साथ सुहाना सफर और ये मौसम हसीं युगल गीत गाया । लायंस क्लब अध्यक्ष अनुज प्रभा और प्रणय नन्दी ने किसी की मुस्कुराहटों पे हो फिदा , प्रकाश झमटानी ने जुबां पे दर्द भरी दास्तां सुनाया । अब्दुल कुरेशी ने वक्त करता जो वफ़ा , शंकर धनवानी ने फूल तुम्हें भेजा है खत में, लक्ष्मण हरजानी नैन हमारे सांझ सकारे, एन के भार्गव तौबा ये मतवाली चाल, रजनीश मैसी तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी , रजनी चंदावत ने एक प्यार का नगमा है , लक्ष्मण चैनानी मेहबूब मेरे तू है तो दुनिया कितनी हसीं है , पत्नी मंजू चैनानी ने मैने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने और फिर दोनों ने फूल तुम्हें भेजा है खत में, चतुर्भुज ने आया है मुझे फिर याद वो जालिम, पूनम गीतांजलि ने आ लौट के आजा मेरे मीत और दयाल प्रियानी ने मैं तो इक ख़्वाब हूं और फिर दोनों ने दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा सुनाकर तालियां बटोरी, मुकेश कुमार आर्य ने जुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई , प्रकाश जेठरा चांद सी महबूबा हो ऐसा मैंने सोचा था, , नीरज मिश्रा मेरी तम्मनाओं की तकदीर तुम संवार दो, , राकेश परिहार वक्त करता जो बफा, जॉन जाने कहाँ गये वो दिन कहते थे तेरी ने तालियां बटोरी । अजय कुलश्रेष्ठ, समीर गर्ग विजय शर्मा सरला और भारती नंदी ने सबका स्वागत किया । कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने मुकेश रफी लता का कोरस गीत *रमैया वस्तावैया* गाकर कार्यक्रम का समापन किया ।
डॉ लाल थदानी
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