मुंबई, 1 अक्टूबर, 2026- एसएंडपी ग्लोबल इंडिया रिसर्च चैप्टर की ताजा रिपोर्ट “इंडिया फॉरवर्डः रीइमैजनिगं ग्रोथ” के मुताबिक, अमेरिका के ऊंचे टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन है। वित्त वर्ष 2026-27 में विकास दर के घटकर लगभग 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है क्योंकि भारत के विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी मैक्रोइकोनॉमिक मजबूती को कितने प्रभावी ढंग से लगातार तेजी में बदल पाता है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अध्यक्ष और क्रिसिल के लिए बोर्ड के चेयरमैन यान ले पैलेक ने कहा, “भारत के पास मैक्रोइकोनॉमिक मजबूती को लगातार आर्थिक रफ्तार में बदलने का एक बड़ा मौका है। हमारी रिसर्च बताती है कि यह देश प्रतिस्पर्धी संघवाद, पूंजी बाजार और बेहतर वित्तीय मध्यस्थता के सहारे भौतिक ढांचागत विकास के अगले चरण को आगे बढ़ाकर इस गति को और तेज कर सकता है।”
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अध्यक्ष डेव अर्न्सबर्जर ने इस रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि होरमुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट, तेजी से विकास कर रहे एशिया के लिए ऊर्जा सुरक्षा की एक कड़ी परीक्षा रही है। तेल, शोधित उत्पादों, गैस और उनसे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला के लिए काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर भारत को कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति में क्रमशः 20 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की कमी का सामना करना पड़ा है। साथ ही एलएनजी की आपूर्ति में भी 16 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारत के लिए आर्थिक मजबूती और ऊर्जा सुरक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि वह आपूर्ति में आ रही लगातार अड़चन का सामना कर रहा है।
इंडिया रिसर्च चैप्टर की ताजा रिपोर्ट में एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल की विश्लेषण टीमों के सात मौलिक थॉट लीडरशिप लेख शामिल हैं। ये लेख इस बात का विश्लेषण करते हैं कि भारत किस तरह अवसरों और चुनौतियों के जटिल माहौल से गुजर रहा है। रिपोर्ट की अन्य मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
· अमेरिका के ऊंचे टैरिफ और दुनियाभर में अनिश्चितता के बावजूद 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी जोकि उम्मीद से कहीं बेहतर है। 2026-27 में विकास दर के घटकर लगभग 7.0 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। विकास दर का यह शानदार प्रदर्शन भारत की घरेलू ताकतों और लगातार अनिश्चित होते वैश्विक माहौल में आगे बढ़ने की उसकी क्षमता को दिखाता है।
· भारत संभवतः संतुलनकारी शक्ति के बजाय एक अग्रणी शक्ति के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखेगा ताकि वह एक अधिक प्रभावशाली वैश्विक खिलाड़ी बनने के अपने इरादे को स्पष्ट कर सके। भारत की भू-राजनीतिक रणनीति के अगले चरण में बड़ी ताकतों के साथ अलग अलग क्षेत्रों में सहयोग और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापक जुड़ाव शामिल होने की संभावना है।
· भारत का आधे से ज्यादा कच्चा तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है जिससे इस जलमार्ग के पूरी तरह बंद होने की स्थिति में भारत सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में एक बन जाता है। इस संकट ने आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर एशिया में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल, शोधित उत्पादों और जहां संभव हो गैस के लिए रणनीतिक भंडार बनाने की जरूरत को उजागर किया है। भारत को एक मजबूत भविष्य के लिए एकीकृत भंडारण, अलग अलग तरह की आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
· डिजिटल रुपया भारत के डिजिटल सार्वजनिक आधारभूत ढांचा की चौथी परत बन सकता है जिसमें नियम सीधे पैसे में शामिल होंगे। टोकन आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में डिजिटल रुपया देशों के बीच होने वाले बिजनेस-टु-बिजनेस व्यापार और रेमिटेंस को अपनी सरकारी मुद्रा से जोड़े रख सकता है जिससे विदेशी मुद्रा वाले स्टेबल कॉइन्स की ओर झुकाव को रोका जा सकेगा।
· पिछले दशक में भारतीय पूंजी बाजार के आकार और गहराई में काफी वृद्धि हुई है। कुछ ही बड़े बाजार ऐसे हैं जहां मजबूत आर्थिक विकास, सूचीबद्ध इक्विटी का बड़ा और बढ़ता हुआ दायरा और उभरती हुई घरेलू चैंपियन कंपनियों से लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों तक का व्यापक समूह मौजूद है। 30 जून, 2026 तक भारतीय शेयर बाजार का निवेश योग्य बाजार पूंजीकरण 2.03 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर था।
· भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अगला चरण जलवायु से जुड़े लक्ष्यों और तेजी से अनिश्चित होती दुनिया में मजबूती बनाए रखने की जरूरत से तय होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य इस बात की याद दिलाता है कि ऊर्जा से जुड़े बाहरी जोखिम किस तरह आत्मनिर्भरता की जरूरत को और बढ़ा सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र के लिए मुख्य चुनौती एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो बड़े पैमाने पर स्वच्छ, भरोसेमंद और सस्ती बिजली दे सके।
· होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद भारत का ई20 कार्यक्रम केवल ईंधन मिश्रण की अनिवार्यता से आगे बढ़कर ऊर्जा सुरक्षा के एक व्यापक विकल्प के रूप में विकसित हुआ है। बढ़ती मांग के साथ तालमेल बिठाते हुए इसके टिकाऊ क्रियान्वयन को इकोसिस्टम की तैयारी और टिकाऊ फीडस्टॉक की आपूर्ति के आधार पर आकार दिया जाएगा।
“इंडिया फॉरवर्ड” को एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल के क्रॉस-डिविजनल इंडिया रिसर्च चैप्टर ने तैयार किया है जो एसएंडपी ग्लोबल इंडिया लीडरशिप काउंसिल की पहल है। यह चैप्टर स्थानीय विशेषज्ञता, वैश्विक दृष्टिकोण और अपनी सभी क्षमताओं को मिलाकर भारत के बारे में खास विचार नेतृत्व प्रदान करता है।