नाली में मल प्रवाहित करना मानवता के विरूद्ध अपराध- डाॅ. आरूषी मलिक
अजमेर को खुले में शौच से मुक्त करने हेतु पार्षदगण के साथ इन्डोर स्टेडियम मे बैठक आयोजित
अजमेर, 21 सितम्बर। महापौर श्री धर्मेन्द्र गहलोत ने कहा कि जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों मेें अभूतपूर्व कार्य हुआ है जिसके चलते कई ग्राम पंचायतें खुलें में शौच से मुक्त हो चुकी है, ऐसे में स्मार्ट सिटी के चयनित अजमेर शहर को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका है, वे आमजन को शौचालय निर्माण व उसके उपयोग के प्रति जागरूक करें।
महापौर श्री गहलोत आज इन्डोर स्टेडियम के सभागार में अजमेर को खुले में शौच से मुक्त करने हेतु आयोजित बैठक में पार्षदगण व अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह बडे दुख की बात है कि स्मार्ट सिटी के लिए चयनित अजमेर शहर खुले में शौच की प्रथा से मुक्त नही हैं, इस अभिशाप से शहर को मुक्त करने के लिए शहर के सभी 60 वार्डाें में जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में मिशन के तहत कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सर्वे के अनुसार अजमेर शहर में 9 हजार घरों में शौचालय बने हुए हैं लेकिन टेंक नही बनाए गए हैं जिससे मल की निकासी सीधे नाली में की जा रही है, जबकि 668 परिवारों के पास शौचालय ही नही है वे खुलें में अथवा सामुदायिक भवन में शौच के लिए जा रहे हैं। सरकार द्वारा इन 668 परिवारों में से 160 परिवारों को शौचालय निर्माण हेतु 4 हजार रूपए की राशि प्रथम किश्त में बैंक खातें द्वारा दी गई थी लेकिन इसके बावजूद इन लोगों ने शौचालय का निर्माण नही करवाया है, जो शहर की स्वच्छता व स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंता का विषय है।
श्री गहलोत ने कहा कि सरकार द्वारा स्वस्थ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण करने पर शहरी क्षेत्रा में 8 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, इस से शौचालय का निर्माण नही हो सकता है लेकिन आमजन को शहर की स्वच्छता व स्वास्थ्य के लिए इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग कर शौचालय निर्माण हेतु प्रेरित करने की आवश्यकता है।
कलक्टर डाॅ. आरूषी मलिक ने कहा कि घरों में शौचालय होने के बावजूद टेंक ना बनाकर सीधे नाली में मल प्रवाहित करना मानवता के विरूद्ध अपराध है, इससे सम्पूर्ण वातावरण दूषित होता है जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि घर में शौचालय का निर्माण बहू-बेटी की इज्जत व सम्मान से जुडा है आज शहरों में जगह की कमी हो गई है ऐसे में महिलाओं को शौच जाने के लिए अंधेरा होने का इंतजार करना पडता है जो समाज के शर्मनाक स्थिति है। समाज को खुले में शौच के इस अभिशाप से मुक्त करने के लिए जनप्रतिनिधि, आम नागरिक एवं अधिकारी सभी को नैतिक कर्तव्य मानकर कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शहर की महिला पार्षद इस बात को समझ सकती हैं कि एक महिला के लिए खुले में शौच के लिए जाना कितना कष्टदायी है अतः सभी महिला व पुरूष पार्षद नारी सम्मान की रक्षा के लिए आमजन को घरांे में शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005-06 में सरकार ने स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से शौचालय बनवाएं थे लेकिन लोगों ने उन शौचालय का उपयोंग करने के बजाय उनमें मवेशी बांध दिए, चारा व अन्य सामान रख दिया। इस प्रकार यह कहना सारगर्भित है कि पैसा देकर शौचालय बनवाने के बजाय आमजन को शौचालय निर्माण व उसके उपयोग हेतु स्वप्रेरित करने की आवश्यकता है, सरकार द्वारा शौचालय निर्माण के पश्चात् सिर्फ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
डाॅ. मलिक ने बताया कि पुष्कर नगर पालिका में 150 शौचालय का निर्माण शेष है, जिसके बाद उसे खुले में शौच से मुक्त कहा जा सकेगा इसी प्रकार जिले के कई ग्राम पंचायतों को भी खुले में शौच के अभिशाप से मुक्त किया गया है। अजमेर शहर को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित किया गया है जिसके तहत स्वच्छता व स्वास्थ्य के मापदंडों पर खरा उतरना आवश्यक है और यह तभी संभव है जब शहर को खुले में शौच के अभिशाप से मुक्त किया जाएगा।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगर निगम श्री एच. गुईटे ने कहा कि सभी पार्षदगण अपने वार्ड को खुले मे शौच से मुक्त करने में आ रही समस्याओं की सूची तैयार करें, जिसके आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि शहर के समस्त वार्डों को खुले में शौच से मुक्त करने हेतु वार्डवार शिविर आयोजित कर आमजन की समस्याओ को सुनकर उसका समाधान करेंगे तो निश्चित ही समस्या का हल निकल जाएगा। इस अवसर पर शहर में कचरा डिपो, विद्युत पोल पर एलईडी लाईट्स एवं स्वच्छता व सफाई पर भी चर्चा हुई।
इस मौके पर अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री हरफूल सिंह यादव, उपायुक्त नगर निगम श्रीमती सीमा शर्मा, पार्षदगण, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद थे।