कतार प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस) तथाकम्प्यूटरीकृत ओपीडी प्रबंधन प्रणाली का शुभारम्भ
आज दिनांक 9.12.2017 को रेलवे अस्पताल अजमेर में रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (स्वास्थ्य) श्री अनिल कुमार द्वारा मुख्य चिकित्सा निदेशक उत्तर पश्चिम रेलवे डॉक्टर ए. के. सैंगर व मंडल रेल प्रबंधक श्री पुनीत चावला की गरिमामयी में उपस्थिति में दो चिकित्सा सेवाओं के कंप्यूटरीकरण का शुभारंभ किया गया यह दो चिकित्सा सेवाएं हैं टोकन आधारित क्यु मैनेजमेंट सिस्टम और कंप्यूटरीकृत ओपीड रजिस्ट्रेशन l इस अवसर पर मंडल के अन्य अधिकारी, डॉक्टर व कर्मचारी उपस्थित थेl आज ही रेलवे अस्पताल के शताब्दी हाल में में आल इंडिया रेलवे रेडिओग्राफर कांफ्रेंस का आयोजन किया गया l
महानिदेशक स्वास्थ्य श्री अनिल कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि रेडियोग्राफर द्वारा जो भी जांच की जाए उस में सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए पेशेंट को यूनिफॉर्म दी जाए वह सदैव धूली हुई हो मरीजों के साथ में उत्तम व्यवहार किया जाना चाहिए साथ ही सेवाओं को और अपग्रेड किया जाए l उन्होंने रेलवे अस्पताल अजमेर को बेहतर प्रबंधन के लिए 40 हजार रूपये के पुरस्कार की भी घोषणा भी की l
मंडल रेल प्रबंधक श्री पुनीत चावला ने अपने उद्बोधन में कहा कि अजमेर रेलवे अस्पताल बहुत पुराना अस्पताल है यह अजब संयोग है कि एक्स-रे की खोज भी 1895 में हुई और इस अस्पताल की स्थापना भी 1895 में हुई जहां यह रेडियोग्राफर कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है उन्होंने महानिदेशक स्वास्थ्य महोदय से अनुरोध किया कि अजमेर रेलवे अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन की आवश्यकता है इसके लिए रेडियोलॉजिस्ट की भी आवश्यकता होती है इस पर महानिदेशक स्वास्थ्य ने जयपुर से सप्ताह में 3 दिन डॉक्टर रेडियोलॉजिस्ट अजमेर में ड्यूटी के आदेश दिए और इस आधार पर सोनोग्राफी मशीन खरीदी जाने की भी स्वीकृति प्रदान की मंडल रेल प्रबंधक पुनीत चावला के अनुसार हॉस्पिटल में 46 लाख की लागत से नया ओपीडी द्वार बनाया जाएगा जिसके लिए वर्क ऑर्डर दे दिया है जिसे शिघ्र ही पूरा किया जायेगा
कतार प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस)
क्व्यू मैनेजमेंट सिस्टम एक एप्लीकेशन है जो उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर डिवीजन द्वारा शुरू किया गया है ताकि सॉफ्टवेयर के माध्यम से डॉक्टर से इलाज हेतु खड़े कतारबद्ध रोगियों को इलेक्ट्रॉनिक टोकन आवंटित किया जा सके।
जबकि वर्तमान में रोगी पंजीकरण काउंटर पर आते हैं, जहां वे कक्ष और डॉक्टर के अनुसार टोकन नंबर लेते हैं। अस्पताल परिचर अपने टोकन की पर्ची देते हैं।
इस प्रणाली के अंतर्गत चिकित्सक और कमरे के लिए रोगी का टोकन नंबर हॉल में लगे टीवी पर प्रदर्शित होगा जिसमें मरीज को टोकन की वर्तमान स्थिति पता लग सकेगा । आगमन के मुताबिक कतार में मौजूद लोगों को संख्याओं के अनुसार टोकन सौंपा जायेगा जिससे मरीजों को अपनी बारी आने के समय प्रबंधन की सुविधा होगी संख्या और लाइन में खड़े होने की बजाय बैठ कर अपनी बारी का इन्तजार कर सकेंगे मरीजों व बुजुर्ग रोगियों के लिए यह एक उत्तम सुविधा है डॉक्टर को भी एक स्क्रीन के माध्यम से मरीजों की मोनिटरिंग की सुविधा होगी
कम्प्यूटरीकृत ओपीडी प्रबंधन प्रणाली
इस सिस्टम में रेलवे मेडिकल ओपीडी प्रणाली का प्रबंधन किया गया है जिसमें वास्तविक समय में मरीज के विवरणों को अपडेट करने के लिए कम्प्यूटरीकृत सिस्टम उपलब्ध कराया गया है । इसके माध्यम से अब अजमेर रेलवे अस्पताल में हर रेलवे कर्मचारी और उनके वार्ड के विवरण का आसानी से प्रबंधन किया जा सकेगा ।
ऑपरेटर द्वारा प्रत्येक रोगी और उसके मेडिकल कार्ड के बायोडाटा को कंप्यूटर में फीड किया जाएगा। जिससे रोगी और उनके वार्डों की जानकारी का सिस्टम पर उपलब्ध हो जाएगी ।
अगली बार आने पर रोगी ऑपरेटर को अपने पीएफ या आर इ एल एच एस नंबर बताएगा वैसे ही सम्बंधित कर्मचारी का डाटा कंप्यूटर पर उपलब्ध हो जायेगा और कंप्यूटर ऑपरेटर डॉक्टर को दिखाने की मरीज की स्लिप प्रिंट कर दे देगा । इसलिए उन्हें हर बार अपना मेडिकल कार्ड लाना नहीं पड़ेगा।
उपरोक्त डिजिटाइजिंग हेल्थकेयर सुविधाओं के लाभ
1. केन्द्रीकृत रिकॉर्ड का रखरखाव – डाटा फीडिंग व स्कैनिंग के द्वारा पेपर दस्तावेजों को डिजिटल फाइलों में बदलने के फलस्वरूप डेटा आसानी से ढूंढा जा सकता है। रिकॉर्ड के ग़लत या खोने की संभावना नहीं रहती व सारा डाटा एक डिजिटल संग्रह में सुरक्षित रूप से संग्रहीत होता हैं।
2. अधिक कुशल बिलिंग प्रबंधन- डाटा फीडिंग व स्कैनिंग के फलस्वरूप कुशल बिलिंग संभव है । चिकित्सा प्रबंधन वास्तव में देख सकते हैं कि कौन से सेवाएं निष्पादित की गईं और कौन-सी दवाएं निर्धारित की गईं, जो दावों और बिलिंग को सरल बनाता है
3. बेहतर सुचना सुरक्षा – कागजी कार्रवाई को खत्म करने के लिए डाटा फीडिंग व स्कैनिंग के फलस्वरूप संवेदनशील फाइलों और मरीज के रिकार्ड अब खुले में नहीं रहेंगे जिससे मरीज से सबंधित गोपनीयता बनी रहेगी ।
4.पेपर स्टोरेज में कमी – कागज भी स्वास्थ्य व पर्यावरण का हिस्सा है, मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ करने का मतलब है कि कागज फ़ाइलों को सुरक्षित रूप से कहीं और संग्रहीत किया जा सकता है पेपर के अधिक उपयोग की आवश्यकता नहीं होगी ।
5. कर्मचारियों की समय बचत – दस्तावेज़ की स्कैनिंग के फलस्वरूप यह सिस्टम न केवल कागज का स्थान कम करता है बल्कि बीमा दावों और बिलिंग जैसे कार्यों को सरल करता है, और कर्मचारियों का समय बचाता है।
. बेहतर ग्राहक सेवा – ग्राहक सेवा को बेहतर बनाता है अगर किसी रोगी को बीमा दावों के लिए चालान या रिकॉर्ड की आवश्यकता पड़ती है तो सभी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है ।
वरिष्ठ जन संपर्क निरीक्षक अजमेर