अह़सास के झरोखों से का लोर्कापण

आज दिनांक 14-4-2019 को अजमेर पुस्तक मेला में अभिनव प्रकाषन अजमेर द्वारा सुनील कुमार उर्फ मित्तल कुमार अह़सासी द्वारा रचित पुस्त ’अह़सास के झरोखों से’ का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी उमेष चौरासिया, बाल कवि गोविंद भारद्वाज, देवतत्त शर्मा एवं चेतना उपाध्याय द्वारा किया गया ।
श्री सुनील कुमार मित्तल उर्फ कुमार अह़सासी ने कहा कि मेरी इस पुस्तक की शीर्षक कविता ’अह़सास के झरोखों से’ पूरी पुस्तक का सार है क्योंकि अह़सास ही है जो कलम को चलाने के लिए मजबूर करता है बिना अह़सास के कोई भी कविता का सृजन नहीं किया जा सकता है ।
उमेष चौरासिया जी ने कहा कि पुस्तक की कविता ’रिष्तों की डोर’ द्वारा हमारे आपसी रिष्तों को कैसे बनाये रखा जाये एवं इन्हें किस प्रकार संवारा जाये का सटीक मार्गदर्षन है । गोविंद भारद्वााज द्वारा कविता ’छलकते पलों का अह़सास है आंसू’ के लिए अपपे विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी आंखों से निकलने वाले आंसू हमारे गम अथवा खुषी की अपारता को दर्षाते है । देवदत्त शर्मा द्वारा कविता ’महिला भ्रूण हत्या/बालिका हत्या’ के बारे में कहा कि महिला जननी स्वरूप है और सृष्टि की रचयिता है बिना जननी के इस संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है अतः हमें जननी का सम्मान करना चाहिए और उसके अस्तित्व की रक्षा करनी चाहिए । सामाजिक रिष्तों में महिला एक मॅंा, एक बहन,एक बेटी, एक भाभी के रूप मेे अपने किरदार का पूर्णतः निर्वहन करती है इसीलिए कहा गया है कि जननी जन्मदात्री र्स्वगादपि गरियसी । चेतना उपाध्याय द्वारा कविता ’बिटिया’ के बारे में कहा कि इस कविता में एक बेटी के स्वरूप एवं उसके द्वारा दी जाने वाली आत्मीयता एवं उसके स्वरूप का जो वर्णन किया गया है वह दिल को छू जाने वाला है ।
अन्त में अभिनव प्रकाषन के अनिल गोयल द्वारा सभी उपस्थित साहित्यकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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