प्राकृतिक चिकित्सा ही श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति – डॉ. भगवान सहाय

आर्य समाज आदर्श नगर द्वारा तपोभूमि परिसर में संचालित दयानंद योग प्राकृतिक चिकित्सा एवं शोध संस्थान की ओर से आयोजित प्राकृतिक चिकित्सा शिविर के समापन के अवसर पर चिकित्सक डॉ. भगवान सहाय ने कहा की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति प्राचीन वैदिक काल से चली आ रही है व समस्त चिकित्सा पद्धतियों की जननी है और इसी के द्वारा असाध्य रोगों का स्थाई निदान संभव है।

इस शिविर में कई जटिल रोगों के मरीजों ने उपचार लिया जिसमें चर्म रोग, पेट के रोग, वजन घटाना, अस्थमा, माइग्रेन, सायटिका,थायराइड, सर्वाइकल, घुटनों का दर्द, सोरायसिस जैसी बीमारियों का पंच कर्म, षष्ट कर्म, फिजियोथैरेपी, सुजोकचिकित्सा, एक्यूपंचर, मेडिटेशन, योग व प्राणायाम के माध्यम से उपचार किया गया जिससे रोगियों को लाभ मिला।

डॉ. भगवान सहाय ने बताया कि कि दूसरी सभी पद्धतियां दवाइयों पर निर्भर है जबकि प्राकृतिक चिकित्सा बिना दवाइयों के उपचार करती है। यह पद्धति थोड़ी धीमी जरूर है लेकिन इससे जो उपचार होता है उसके उपरान्त यदि रोगी व्यक्ति नियम- संयम व संतुलित शाकाहारी आहार से पालन करें तो वह स्थिति दोबारा नहीं बनती और रोग का निदान हमेशा के लिए हो जाता है।

इस शिविर में डॉ. भगवान सहाय के साथ चिकित्सक डॉ नवल किशोर पिंगोलिया व चिकित्सा सहायक पवनकुमार, हेमंत कुमार, सिमरन और निर्मला ने सेवाएं दी।

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