
देवनानी ने कहा कि एसओजी की अब तक जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि परीक्षा होने से पहले ही पेपर रीट अभ्यर्थियों तक पहुंच गया था। एसओजी ने परीक्षा कार्य से जुड़े कई व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। सरकार ने जारौली को बर्खास्त कर दिया है, लेकिन अभी तक जारौली की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। यह चर्चा भी जोरों पर है कि रीट परीक्षा में तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग का काफी दखल रहा है। जारौली ने गर्ग की सिफारिश पर ही प्रदीप पाराशर और रामकृपाल मीणा को जयपुर जिले का कॉर्डिनेटर बनाया था। जयपुर स्थित शिक्षा संकुल से 25 सितंबर को पाराशर और मीणा ने ही एक लिफाफे से पेपर चुराया।
देवनानी ने कहा कि रीट की परीक्षा में गर्ग का खासा दखल रहा, यह इसी बात से जाहिर हो जाता है कि वर्ष 2011 में जब गर्ग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष थे, तब परीक्षा के पेपर कोलकाता की जिस प्रिंटिंग प्रेस से पेपर छपवाए, उसी प्रेस से जारौली ने 2021 की रीट के प्रश्न पत्र भी छपवाए। बोर्ड अध्यक्ष रहते हुए गर्ग ने अजमेर की कम्प्यूटर फर्म माइक्रोनिक कम्प्यूटर्स से ओएमआर शीट का काम करवाया, उसी फर्म से ही जारौली ने परीक्षा के फाॅर्म भरवाने से लेकर ओएमआर शीट जांचने तक का सारा काम कराया।
देवनानी ने कहा, इन सब तथ्यों से साफ पता चलता है कि जारौली ने वही किया, जो गर्ग ने कहा। 26 सितंबर 2021 को हुई रीट परीक्षा के समय गोविंद सिंह डोटासरा स्कूली शिक्षा मंत्री थे, लेकिन वे पूरी तरह चुप्पी साधे रहे और उन्होंने जारौली को वह सब करने दिया, जो गर्ग चाहते थे। डोटासरा ने ना उस वक्त मुंह खोला और ना ही पेपर लीक का मामला उजागर होने के बाद से आज तक मुंह खोल रहे हैं। यानी डोटासरा पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं, जो इस बात का संकेत है कि पूरे घालमेल में डोटासरा की मौन स्वीकृति रही है। यह बात आज तक किसी के समझ में नहीं आ रही है कि डोटासरा शिक्षा विभाग के स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री रहे, फिर उन्होंने रीट की पूरी माॅनिटरिंग क्यों नहीं की और गर्ग व जारौली को सब-कुछ करने की खुली छूट किसलिए दी।
देवनानी ने कहा, नियमों में यह कहीं प्रावधान नहीं है कि राजस्थान की किसी फर्म को ओएमआर शीट जांचने का काम दिया जा सकता। इसके बावजूद बोर्ड ने अजमेर की फर्म को ही सारा कार्य दे दिया। यही नहीं, नियमों के विपरीत काॅलेजों सहित अनेक परीक्षा केंद्रों पर उन्हें आॅब्र्जवर बनाया गया, राजीव गांधी स्टडी सर्कल से जुड़े हुए हैं। गर्ग इस संस्था के संयोजक हैं। पूरे मामले में देखें, तो केवल पेपर ही आउट नहीं हुआ, बल्कि हर स्तर पर गड़बड़ी हुई।
देवनानी ने सवाल किया कि जब शिक्षा मंत्री को कोई जानकारी नहीं थी, तो फिर जारौली ने किसके कहने पर प्राइवेट व्यक्तियों को काॅर्डिनेटर नियुक्त किया था। जो भी हो और जिसके भी कहने पर ऐसा किया गया हो, लेकिन यह सच तो सभी के सामने आना ही चाहिए कि असली गुनाहगार कौन है। उन्होंने कहा कि जब तक जारौली को गिरफ्तार नहीं किया जाता और जारौली के साथ-साथ गर्ग से गहन पूछताछ नहीं की जाती, तब तक पूरी तरह सच्चाई सामने नहीं आ सकती है। इसलिए एसओजी को तत्काल प्रभाव से इन दोनों से पूछताछ करनी चाहिए।