केकड़ी 16 अप्रैल(पवन राठी)शक्करगढ़ स्थित अमर ज्ञान निरंजनी आश्रम के महा मंडलेश्वर आचार्य श्री जगदीशपुरी जी ने गीता भवन में चल रही भागवत कथा में कहा कि इंसान की जैसी दृष्टि होती है उसे वैसी ही सृष्टि नजर आती है। जो व्यक्ति गुरु और भगवान की बात मानता है वही असली आनंद की प्राप्ति कर सकता है। धन अशांति का सबसे बड़ा कारण है शांति चाहिए तो त्याग की भावना मन मे होनी चाहिए।संसार दुखो का निवास स्थान है यंहा हमेशा आनंद का भ्रम बना रहता है मन मैला होने के कारण वास्तविकता में यह किसी को प्राप्त नही होता है।
इसके साथ ही आचार्य श्री ने कहा कि इंसान को जीवन मे सत्संग संत सेवा व प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए जिससे आत्मा को उसकी खुराक मिलती रहेगी।प्रभु को मानने वाला व्यक्ति ही सुखी जीवन जी सकता है।धर्म तोड़ने का नही जोड़ने का कार्य करता है।
कथा के अंत मे भगतानी परिवार के परिजनों ने श्री मद भागवत जी की आरती की।