सावन के सोमवार पर महादेव का अभिषेक

 अजमेर । नया बाजार शिवबाग स्धित प्राचीन मराठा कालीन अर्ध चन्द्रेश्वर महादेव शिव मंदिर पर आज सावन के दुसरे सोमवार के अवसर पर महादेव का अभिषेक  किया गया।  मंदिर के पुजारी पण्डित श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि शुक्ला परिवार की ओर से विधि विधान से मंत्रोचार के साथ गन्ने के रस से महादेव  के … Read more

प्रकृति के सान्निध्य में विद्यार्थियों ने मनाया आनंदमय पिकनिक दिवस

ब्यावर। श्री वर्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित श्री नृसिंह अग्रसेन जैन विद्यापीठ के विद्यार्थियों के लिए आज आनंद, उत्साह और रोमांच से भरपूर पिकनिक का आयोजन किया गया। पिकनिक के दौरान विद्यार्थियों ने प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेते हुए विभिन्न मनोरंजक एवं साहसिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पिकनिक में विद्यार्थियों के लिए प्रकृति से … Read more

धार्मिक दर्शन से शुरू हुआ दिन, पूल पार्टी और भक्ति नृत्य से बढ़ी रौनक

टी ग्रुप के आयोजन में आस्था, आनंद और आपसी भाईचारे का दिखा संगम अजमेर। टी ग्रुप की ओर से रविवार को धार्मिक आस्था, आध्यात्मिकता और मनोरंजन से भरपूर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन में ग्रुप के सदस्यों ने विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन कर सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। इसके बाद मनोरंजक गतिविधियों … Read more

अजमेर सरस डेयरी में उल्लास व भक्ति का संगमः

सहस्रधारा पूजा एवं भगवान कार्तिक की मूर्ति स्थापना का भव्य आयोजन** ** डेयरी अध्यक्ष रामचन्द्र चौधरी ने धर्मपत्नी मूली देवी के साथ की विशेष पूजा- अर्चना; समस्त दुग्ध उत्पादकों एवं डेयरी परिवार की सुख-समृद्धि की कामना** अजमेर: अजमेर सरस डेयरी प्रांगण आज वैदिक मंत्रोच्चार और शिव के जयकारों से गुंजायमान रहा। डेयरी परिसर में पूरे … Read more

महाराजा दाहरसेन की 1357वीं जयंती विद्यालय स्तर पर रंग भरो प्रतियोगिता

अजमेर 10 अगस्त। राष्ट्र की रक्षा, धर्म और संस्कृति की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सिंध के महान धर्मवीर, दानवीर एवं युद्धवीर सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन की 1357वीं जयंती के अवसर पर विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से रंग भरो प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। … Read more

अग्रवाल समाज अजमेर की कार्यसमिति की बैठक संपन्न

संस्था के भावी कार्यक्रमों के बारे में लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अजमेर 10 अगस्त / अग्रवाल समाज अजमेर की कार्यसमिति की बैठक संस्था अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल की अध्यक्षता में बजरंगगढ़ चौराहे के पास एक रेस्टोरेंट में आयोजित की गयी जिसमें संस्था के भावी कार्यक्रमों के बारे में विचार विमर्श कर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये … Read more

हमारे गौरव – जैन सम्राट

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, राजा सम्प्रति, राजा कुमारपाल, रानी अब्बाका अजमेर 10 अगस्त – नाका मदार स्थित जिन शासन तीर्थ क्षेत्र पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में भारतीय जैन मिलन, आदिनाथ शाखा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने क्षेत्रीय अध्यक्ष वीर प्रकाश जैन पाटनी के नेतृत्व में मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निस्पृह सागर … Read more

पूर्वांचल जन चेतना समिति चैरिटेबल ट्रस्ट की पहल “”इस मानसून एक पौधा भविष्य के नाम”

भीलवाड़ा। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प के साथ पूर्वांचल जनचेतना समिति चैरिटेबल ट्रस्ट एवं राजस्थान पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में “इस मानसून एक पौधा भविष्य के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। अभियान के तहत आज राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, मोहकमपुरा, आजाद नगर, गांधी नगर, भीलवाड़ा परिसर … Read more

कुंभिनासी : लंका से मथुरा तक जाती एक विस्मृत पौराणिक गाथा

भारत की पौराणिक स्मृति में कुछ कथाएँ ऐसी हैं, जो मुख्य आख्यानों के पीछे रह जाती हैं। रामायण का नाम आते ही हमारे सामने राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और रावण के विराट चरित्र उभरते हैं। विभीषण, कुंभकर्ण और शूर्पणखा भी हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। लेकिन उसी विशाल कथा-परंपरा में एक स्त्री ऐसी भी है, जिसकी कहानी लंका के राजमहल से आरंभ होकर यमुना के किनारे बसे मधुवन तक पहुँचती है और अंततः मथुरा की प्राचीन स्मृति से जुड़ जाती है। उसका नाम है “कुंभिनासी”। कहीं उन्हें कुंभिनी कहा गया है, कहीं कुम्भीनसी। लोकप्रिय कथाओं में उन्हें रावण की बहन के रूप में याद किया जाता है। लेकिन जब रामायण की अलग-अलग परंपराओं और वंश-विवरणों को साथ रखकर देखा जाता है, तो उनका संबंध कुछ अधिक जटिल दिखाई देता है। यही जटिलता इस कथा को और रोचक बनाती है।कुंभिनासी की कहानी केवल एक राक्षसी स्त्री की कथा नहीं है। यह परिवार, सत्ता, प्रेम, प्रतिशोध, विवेक और नियति की ऐसी कहानी है, जिसके एक छोर पर लंका है और दूसरे छोर पर मथुरा। और इन दोनों के बीच खड़ी है – एक स्त्री।   लंका के राजवंश से जुड़ी एक स्त्री रामायण की वंश-परंपरा में कुंभिनासी का संबंध लंका के राक्षस-कुल से अत्यंत निकट बताया गया है। विभीषण जब रावण को उनके अपहरण का समाचार देते हैं, तो उनके संबंध को मातृकुल के माध्यम से समझाते हैं। वे उन्हें भाइयों की बहन के समान बताते हैं। इसी कारण बाद की लोकप्रिय परंपरा में कुंभिनासी को रावण की बहन के रूप में जाना गया।  लेकिन रामायण की कथा में एक दूसरा वंश-विवरण भी मिलता है, जिसमें कुंभिनासी को विश्वावसु और अनला की पुत्री तथा मधु की पत्नी कहा गया है। उन्हीं से लवण नामक पुत्र का जन्म बताया गया है।  इसलिए कुंभिनासी को लेकर सबसे सावधानीपूर्ण बात यही होगी कि उन्हें रावण के मातृकुल से अत्यंत निकटता रखने वाली स्त्री कहा जाए, जिसे कथा में बहन के समान संबोधित किया गया है। भारतीय प्राचीन आख्यानों में रिश्तों की भाषा हमेशा आधुनिक जैविक संबंधों जैसी सीधी रेखा में नहीं चलती। मातृकुल, पितृकुल और कुल-संबंधों की अपनी सामाजिक संरचना थी। संभवतः इसी कारण कुंभिनासी की पहचान अलग-अलग पाठ-परंपराओं में कुछ भिन्न रूपों में दिखाई देती है। लेकिन उनके जीवन की अगली घटना बिल्कुल स्पष्ट है; और यहीं से कहानी में एक नया मोड़ आता है।   मधु का आगमन उस समय लंका में शक्ति का केंद्र रावण था। उसकी महत्वाकांक्षा सीमाओं से परे फैल चुकी थी। वह विजय-अभियान पर था और उसके पीछे लंका की सत्ता, सेना और राजकीय प्रतिष्ठा का भार था। इसी समय एक शक्तिशाली राक्षस लंका पहुँचा। उसका नाम था “मधु”। मधु केवल बलवान ही नहीं था। रामायण की परंपरा में उसका चित्रण लवणासुर से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। वह ब्राह्मणों का सम्मान करता था, शरणागत की रक्षा करता था और देवताओं के साथ भी मैत्रीपूर्ण संबंध रखने वाला बताया गया है। उसके व्यक्तित्व में शक्ति थी, लेकिन वह शक्ति अभी तक अनियंत्रित हिंसा में नहीं बदली थी। लेकिन कुंभिनासी को देखकर मधु का मन बदल गया। उसने कुंभिनासी को बलपूर्वक अपने साथ ले लिया। यह घटना उस समय हुई जब लंका के राजपरिवार के प्रमुख सदस्य अलग-अलग कार्यों में व्यस्त थे। रावण विजय-अभियान पर था, विभीषण अपने धार्मिक कर्म में लगे थे और कुंभकर्ण निद्रा में था। मधु ने अवसर का लाभ उठाया और कुंभिनासी को अपने साथ मधुपुरी ले गया। कुंभिनासी का यह हरण केवल एक स्त्री के जीवन में आए संकट की घटना नहीं थी। यह आने वाले एक बड़े संघर्ष का बीज था। क्योंकि कुंभिनासी जिस परिवार से आती थीं, वहाँ अपमान का उत्तर प्रायः तलवार से दिया जाता था। और रावण को जब यह समाचार मिला, तो उसका क्रोध स्वाभाविक ही था। रावण के लिए यह केवल किसी स्त्री का अपहरण नहीं था। यह उसके कुल को दी गई चुनौती थी। उसने अपनी सेना संगठित की और मधु की नगरी की ओर बढ़ चला। मधुपुरी पहुँचकर रावण ने मधु को खोजा, लेकिन वह वहाँ उपस्थित नहीं था। वहाँ उसे अपनी ही संबंधिनी कुंभिनासी दिखाई दी। रावण का क्रोध अभी शांत नहीं हुआ था। लेकिन कुंभिनासी ने उसे देखते ही भय से उसके चरण पकड़ लिए। उनके सामने दो पुरुष थे—एक उनका भाई और दूसरा उनका पति। और दोनों के बीच शीघ्र ही रक्तपात होने वाला था। कुंभिनासी ने रावण से अपने पति के प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की। उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं माँगा। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि मधु मारा गया तो उनका जीवन विधवा के रूप में समाप्त हो जाएगा। उन्होंने अपने पति के अपराध के बावजूद उसके प्राणों की याचना की। रावण का हृदय पिघल गया। उसने अपनी संबंधिनी की प्रार्थना स्वीकार कर ली। मधु को क्षमा कर दिया गया। लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं हुई। रावण ने मधु को अपना शत्रु बनाने के बजाय अपना सहयोगी बना लिया। वह चाहता था कि मधु उसके साथ देवताओं के विरुद्ध होने वाले अभियान में सहयोग करे। कुंभिनासी ने मधु को जगाया और उसे रावण के प्रस्ताव से अवगत कराया। मधु ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इस प्रकार जिस घटना की शुरुआत अपहरण और प्रतिशोध से हुई थी, उसका अंत संबंध और राजनीतिक मैत्री में हुआ। यह कुंभिनासी के चरित्र का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था। उन्होंने युद्ध नहीं लड़ा। उन्होंने कोई अस्त्र नहीं उठाया। लेकिन उन्होंने दो शक्तिशाली पुरुषों के बीच होने वाला युद्ध रोक दिया। उनका हथियार था – संबंध और संवाद। शिव का वरदान मधु की शक्ति केवल उसकी सेना या उसके व्यक्तिगत पराक्रम में नहीं थी। उसके पास भगवान शिव का दिया हुआ एक अद्भुत अस्त्र भी था। रामायण की कथा के अनुसार मधु ने घोर तपस्या से रुद्र को प्रसन्न किया था। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उसे एक दिव्य शूल प्रदान किया। उस अस्त्र की शक्ति असाधारण थी। जब तक वह अस्त्र मधु के हाथ में रहता, उसे युद्ध में पराजित करना अत्यंत कठिन था। वह उस व्यक्ति का विनाश कर देता जो मधु को युद्ध के लिए चुनौती देता और फिर वापस अपने स्वामी के पास लौट आता। मधु ने शिव से प्रार्थना की कि यह शक्ति उसके वंश में बनी रहे। तब उसे बताया गया कि यह वरदान उसके पुत्र तक पहुँचेगा। जब तक वह दिव्य शूल उसके पुत्र के हाथ में रहेगा, वह संसार के प्राणियों के लिए लगभग अवध्य रहेगा। मधु ने उस वरदान को स्वीकार किया। लेकिन उसे शायद यह पता नहीं था कि भविष्य में यही वरदान उसके पुत्र के लिए शक्ति से अधिक अहंकार का कारण बनने वाला है। कुंभिनासी और लवणासुर मधु और कुंभिनासी के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। … Read more

अरावली की परिभाषा और संरक्षण को लेकर अजमेर में हुई व्यापक जनसुनवाई

च्चतम न्यायालय की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने खनन, पर्यावरण, आजीविका एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े हितधारकों को सुना खनन व्यवसायियों, श्रमिकों, पर्यावरणविदों, पशुपालकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने दिए महत्वपूर्ण अभ्यावेदन      अजमेर, 9 अगस्त। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की जनसुनवाई रविवार को जवाहर रंगमंच अजमेर में सम्पन्न हुई। जनसुनवाई में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा, पारिस्थितिक अखंडता एवं संरक्षण … Read more

15 अगस्त के विभिन्न प्रधानमंत्री के भाषण के प्रमुख अंश

स्वतंत्रता दिवस भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंत और स्वतंत्रता और स्वशासन के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। 15 अगस्त के विभिन्न प्रधानमंत्री के भाषण के प्रमुख अंश:—-  अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्रियों के लाल किले से दिए गए भाषणों के … Read more

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