36 साल बाद फिर भारत को यूरेनियम बेचेगा कनाडा

कनाडा भारत द्वारा वर्ष 1974 में परमाणु परीक्षण के बाद यूरेनियम आपूर्ति पर लगाई गई पाबंदी 36 साल बाद हटाने जा रहा है। कनाडाई प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के छह दिवसीय भारत दौरे के दौरान द्विपक्षीय समझौतों की श्रृंखला में दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु करार को लागू करने का फैसला किया गया है। इस समझौते के बाद कनाडाई कंपनियों को भारत को यूरेनियम और परमाणु रिएक्टर बेचने की मंजूरी मिल जाएगी। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कनाडा में काम करने वाले भारतीय दोहरे कराधान के बोझ से मुक्त हो जाएंगे।

दोनों देशों के बीच परमाणु करार वर्ष 2010 में हो गया था, जिसे लागू करने का फैसला अब लिया गया है। दोनों देशों ने सूचना प्रौद्योगिकी और रक्षा तकनीक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इस दौरान आतंक के खिलाफ लड़ाई में आपसी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया। साथ ही साझेदारी बढ़ाने के लिए अगले साल तक व्यापक आर्थिक सहयोग करार को अंतिम रूप देने का फैसला भी किया गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऊर्जा, कारोबार व निवेश, कृषि और रक्षा क्षेत्र से जुड़े समझौतों को बढ़ावा देने के लिए कनाडाई समकक्ष हार्पर से बातचीत की। प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि हार्पर के दौरे के दौरान असैन्य परमाणु करार को लागू करने का फैसला तमाम समझौतों के बीच मील का पत्थर है। हार्पर ने जोर देते हुए कहा कि भारत को यूरेनियम की बिक्री कनाडाई कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर साबित होगा। साथ ही दोनों देशों के बीच हुए सामाजिक सुरक्षा समझौते का फायदा कनाडा में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को मिलेगा। अगर वे भारत में सामाजिक सुरक्षा भुगतान कर रहे हैं, तो उन्हें कनाडा में इसका भुगतान नहीं करना होगा।

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