पौराणिक व ऐतिहासिक तीर्थराज पुष्कर

अजमेर शहर से मात्र 11 किलोमीटर दूर तीर्थराज पुष्कर विश्वविख्यात है और पुराणों में वर्णित तीर्थों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। अनेक पौराणिक कथाएं इसका प्रमाण हैं। यहां से प्रागैतिहासिककालीन पाषाण निर्मित अस्त्र-शस्त्र मिले हैं, जो उस युग में यहां पर मानव के क्रिया-कलापों की ओर संकेत करते हैं। अजमेर से मात्र 11 किलोमीटर दूर … Read more

पुरातात्विक महत्व भी कम नहीं

शताब्दियों पूर्व बसे आज के अजमेर ने कितनी ही सल्तनतों का उद्भव और पराभव होते देखा है। यहां कितनी ही विशाल इमारतें बनी और ढह गईं, लेकिन उनके जीवित अवशेष यहां पर हुई अनेक राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक घटनाओं के आज भी साक्षी हैं। पुरातात्विक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। अजमेर पुरातात्विक दृष्टि से काफी … Read more

ऐतिहासिक अजमेर

राजस्थान की हृदयस्थली अजमेर देश के इतिहास में भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी स्थापना महाराजा अजयराज ने की। यहां पर सातवीं से बारहवीं शताब्दी तक चौहान शासकों का शृंखलाबद्ध राज्य रहा। मुगल बादशाहों ने यहां अपना आधिपत्य तो जमाया ही, अनेक सैन्य अभियान भी चलाए। आजादी से पहले तक यह अंग्रेजों के कब्जे … Read more

अजमेर : एक संक्षिप्त परिचय

जगतपिता ब्रह्मा की यज्ञ-स्थली तीर्थराज पुष्कर और महान सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह की वजह से दुनियाभर में विख्यात अजमेर अपनी विशिष्ट मिली-जुली संस्कृति व सांप्रदायिक सौहाद्र्र के लिए जाना जाता है। पेश है अजमेर का संक्षिप्त परिचय। जगतपिता ब्रह्मा की यज्ञ-स्थली तीर्थराज पुष्कर और महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती … Read more

संपादकीय

फिर हासिल करना होगा गौरव अरावली पर्वतशृंखला के आंचल में महाराजा अजयराज चौहान द्वारा स्थापित यह नगरी दुनिया में अपनी खास पहचान रखती है। इसका आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व इसी तथ्य से आंका जा सकता है कि सृष्टि के रचयिता प्रजापिता ब्रह्मा ने तीर्थगुरू पुष्कर में ही आदि यज्ञ किया था। पद्म पुराण के अनुसार … Read more

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