चोरी के अतिचारों को समझ कर बचे =गुरूदेव श्री प्रियदर्शन मुनि*
संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि बाहर की सजावट के लिए पर की (दूसरों )की आवश्यकता होती है, मगर भीतर की सजावट के लिए पापों को छोड़ने की आवश्यकता होती है । तीसरे पाप अदतादान पर चर्चा चल रही है, श्रावक के तीसरे व्रत में इसके पांच अतिचार बताए हैं पहला … Read more