वैश्वानर, तेजस और प्राज्ञ स्वरूप का प्रकटीकरण है योग – डॉ स्वतंत्र शर्मा
अपने अस्तित्व के स्थूल स्वरूप की वैश्वानर अवस्था को जानकर इसमें व्याप्त प्राण के तेजस को प्रकट करना और उसे विस्तार देकर बुद्धि की प्रज्ञा से आध्यात्मिक विकास करना ही योग है योग से स्वयं को जानने की प्रक्रिया श्वास पर अपने ध्यान को केंद्रित करने से शुरू होती है और फिर यह सजगता शारीरिक … Read more