इस युद्ध में सरदार कहां है…

-गौरव अवस्थी– जिन्होंने देश पर दस साल राज किया। इन वर्षों में देश कहां से कहां (कांग्रेसी  कहते हैं उत्कर्ष पर, विरोधी कहते हैं रसातल में और जनता कहती है मुश्किल में) पहुंचा दिया। कहते हैं कि उनकी ही नीतियों से भारत दुनिया की दूसरी सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश बन चुका … Read more

आप हो या बाप ! मलाई बांटने ‘ चालाक बंदर’ पहुंच ही जाते हैं…!!

अन्ना हजारे से अलग होकर अरविंद केजरीवाल ने जब आप नाम से नई पार्टी बनाई तो किसी को भी  इस बात का भान नहीं था कि दिल्ली चुनाव में यह इतनी जबरदस्त सफलता हासिल करेगी। चुनाव बाद जब  इसकी  लोकप्रियता चरम पर थी, तब भी इसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह नई पार्टी … Read more

आखिर जसवंत सिंह का कसूर क्या है ?

-निरंजन परिहार- जसवंत सिंह एक बार फिर अकेले हैं। पिछले चुनाव में भी निर्दलीय थे। और इस बार भी बीजेपी ने उनको अकेला कर दिया। टिकट नहीं दिया। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भले ही उन्हें पसंद ना करें। संघ परिवार को खुश रखने की कोशिश में बहुत सारे भाजपाई भी भले ही जसवंत सिंह को … Read more

भाजपा के भीतर दिल्ली में ही नहीं सरहद पर भी जंग

भाजपा के भीतर दिल्ली में ही नहीं सरहद पर भी जंग छिड़ गई है। राजस्थान के सरहदी इलाके बाड़मेर लोकसभा सीट के लिए आखिरकार भाजपा ने कर्नल सोनाराम चौधरी के नाम ऐलान कर दिया है। पार्टी पर कर्नल का नाम घोषित करने का दबाव पहले से ही था। ऊपर से राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे … Read more

सोशल मीडिया के हवाले है आम चुनाव

-दीपक कुमार-  वैसे तो फेसबुक और​ ​ट्विटर जैसे सोशल साइट्स पर मेरी मौजूदगी बहुत कम ही रहती है, लेकिन इन दिनों जब भी मैं अपने ट्विटर या फेसबुक अकाउंट को साईन-इन करता हूं। चुनावी प्रचार के पोस्टरों की भरमार देखने को मिलती है, साथ ही कुछ दिलचस्प पॉलिटिकल जोक्स पॉलिटिकल वीडियो भी देखने को मिलती … Read more

रजत शर्मा ने इमरजेंसी के दौरान थाने में टार्चर सहा और जेल गए?

अरविंद केजरीवाल को झूठा बताने वाले रजत शर्मा खुद झूठ में उलझ गये हैं. इंडिया टीवी पर 14 मार्च को प्रसारित 9 बजे के कार्यक्रम “आज की बात” में रजत शर्मा ने अरविंद केजरीवाल के कई पेंच खोलने की कोशिश की. बुखार होने और बीमार होने के बाद भी रजत शर्मा ने पत्रकारिता के प्रति … Read more

मीडिया मोदी को ज़ीरो से हीरो बना चुका है

-नीरज वर्मा- चुनावी अंधड़ चल रहा है ! कुछ उड़ जाने वाले हैं और कुछ उड़ा देने वाले हैं ! कुछ का कहना है कि मोदी नाम की “सुनामी” आयी हुई है ! मसलन हर रैली का लाइव कवरेज, सोने-उठने बैठने तक की खबर ! कोई तीखे सवाल नहीं ! विरोधियों की ज़बर्दस्ती आलोचना ! ये … Read more

अन्ना-ममता फ्लॉप शो के निहितार्थ

-निर्मल रानी- दिल्ली के रामलीला मैदान में गत् 12 मार्च को अन्ना हज़ारे के समर्थकों तथा ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित रैली पूरी तरह से एक फ्लॉप शो साबित हो कर रह गई। इस रैली में शिरकत करने वाले आम दिल्लीवासियों की तुलना में मीडिया कर्मियों, रैली आयोजकों तथा सुरक्षाकर्मियों … Read more

मोदी की आक्रामक राजनीति के चलते एनडीए का विस्तार हो रहा है

-अखिलेश अखिल- आसन्न लोक सभा चुनाव में भाजपा कितनी सफल होगी और मोदी की राजनीति कितनी रंग लाएगी इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी हो सकती है। लेकिन इतना तो तय है कि मोदी की आक्रामक राजनीति की वजह से मृत प्रायः एनडीए फिर से आकार लेने लगा है। एनडीए का विस्तार हो रहा है … Read more

पुण्य प्रसून सेटिंगबाज नहीं हो सकता

-संतोष मानव- पहले ही साफ कर दूं कि मैं पुण्य प्रसून वाजपेयी को जानता हूं। मैंने उनके साथ नागपुर के लोकमत समाचार में वर्षों काम किया हैं। वे मेरे मित्र हैं, बावजूद इसके मेरी बात- सोमवार सुबह से उन पर यू टयूब पर लोड एक वीडियो क्लिपिंग को लेकर जिस तरह से हमले हो रहे … Read more

पीआरओ बनकर जर्नलिज्म नहीं कर सकते

-प्रमोद पांडेय- मेरे लिए केजरीवाल-पुण्य प्रसून प्रकरण तहलका के तरुण तेजपाल से कहीं ज्यादा शॉकिंग रहा है। खोजी पत्रकारिता, प्रगतिशील विचारों के लिए तरुण तेजपाल के लिए हमारे मन में गहरा सम्मान रहा है। अपने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को जब ‘इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग/ जर्नलिज्म’ का अध्याय पढ़ाता था तो तहलका और तरुण की रिपोर्टिंग, सत्साहस-दुस्साहस का … Read more

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