राजस्थान कांग्रेस में दिग्गजों को दरकिनार करने की साजिश

राजस्थान कांग्रेस रणभूमि बनी हुई है। खतरा डिजिटल खेल का है। तीर बाहर अंदर से चल रहे हैं। केंद्र में हैं गोविंद सिंह डोटासरा, जो अपने समर्थकों की हरकतों की हवा से घिरते हुए, धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हुए और दूसरों को दरकिनार ठिकाने लगाने की कोशिश में खुद ठिकाने लगते हुए।  यह परिदृश्य इसलिए बना क्योंकि … Read more

लपटों ने लपेटा, तो विकास के बजाय राजनीति में भी झुलस रही रिफाइनरी

पचपदरा। रेत का विस्तार। तेल की रिफाइनरी। उम्मीदों का आसमान। रोजगार की फैक्ट्री और ऊर्जा का स्वप्न। लेकिन अचानक आग। सपलपाती लपटों ने रिफाइनरी को लपेट लिया। वह भी प्रधानमंत्री के आने से कुछ घंटे पहले। आग से भी तेज, आग की खबर फैली। सियासत उससे भी तेज़ भागी। क्योंकि यह कोई साधारण परियोजना नहीं। राजस्थान के औद्योगिक भविष्य की धुरी। लेकिन एक लपट ने सबको लपेटे में … Read more

छात्रों का आत्मघातः सपनों का बोझ है या सिस्टम की नाकामी?

कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में दो महीनों के भीतर चार छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं केवल एक संस्थान की त्रासदी एवं नाकामी नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय समाज, शिक्षा व्यवस्था और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर लगा गहरा प्रश्नचिह्न हैं। ये घटनाएं हमें झकझोरती हैं कि आखिर वह कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनमें देश की … Read more

महामृत्युंजय: मृत्यु के पार चेतना का विज्ञान

मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ ऐसे सूत्र, ध्वनि-विन्यास और आध्यात्मिक प्रयोग विद्यमान हैं, जो सामान्य धार्मिक आस्था की सीमाओं से परे जाकर कहीं अधिक गहरे और व्यापक अर्थों को धारण करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र ऐसा ही एक विरल सूत्र है—एक ऐसा मंत्र जो मात्र प्रार्थना नहीं, बल्कि चेतना, ऊर्जा और जीवन के गहन रहस्यों … Read more

अष्टद्रव्यपूजा गीत

अष्टद्रव्य से पूजा करें, भावों का विस्तार, प्रभु चरणों में अर्पित करें, श्रद्धा अपार। जल-चंदन-अक्षत-पुष्प, नैवेद्य दीप उजियार, धूप-फल से पूर्ण हो, प्रभु का सत्कार॥ जल चढ़ाऊँ चरणों में, समर्पण का भाव, जैसे बहता निर्मल जल, नम्र बने स्वभाव। हे प्रभु! ऐसा विनय दे, मन हो निर्मल-नीर, तेरे चरणों में बसूँ, मिटे अहंकार की पीर॥ चंदन तिलक लगाऊँ मैं, श्रद्धा का आधार, हृदय में तेरा स्मरण, हो जीवन साकार। तेरे प्रति विश्वास से, भर जाए यह मन, हर श्वास में बस जाए, प्रभु तेरा ही ध्यान॥ अक्षत अर्पण करूँ मैं, भेद-विज्ञान का प्रकाश, सत्य-असत्य का भान हो, मिटे अज्ञान का त्रास। शुद्ध चेतना जागे अब, अंतर का हो सुधार, तेरी वाणी से मिले, जीवन को आधार॥ पुष्प चढ़ाऊँ प्रेम से, हृदय की यह पुकार, भावों की सुगंध से, महके सारा संसार। प्रेम ही पूजा सच्ची है, प्रेम ही तेरा द्वार, तेरे चरणों में मिले, जीवन का सार॥ नैवेद्य अर्पित करूँ, तुझको ही समर्पण, जो कुछ पाया है प्रभु, तुझको ही अर्पण। तेरी कृपा से मिला सब, हे पतित-पावन, सेवा में ही सुख मिले, धन्य हो यह जीवन॥ दीप जलाऊँ ज्ञान का, मिटे अज्ञान अंधेरा, तेरी कृपा से जागे, अंतर का सवेरा। ज्ञान-ज्योति जलती रहे, हर पल हर बार, तेरे मार्ग पर चलूँ, हो जीवन का उद्धार॥ धूप चढ़ाऊँ भाव से, सद्गुण की महक, जैसे सुगंध फैलती, वैसे गुण चमक। करुणा, दया, क्षमा भर दे, ऐसा हो व्यवहार, तेरी भक्ति में ढले जीवन, हो भव-पार॥ फल अर्पित करूँ, प्रभु कृपा बरसाए, सार्थक हो यह जीवन, मिटे जन्म का जाल। तेरे चरणों में मिले, कर्मों का विश्राम, फलवान हो आराधना, पूर्ण हों सब काम॥ अष्टद्रव्य की यह पूजा, भावों की पहचान, समर्पण से फल तक का, सुंदर यह विधान। हे जिनवर! कृपा करो, रहे अटल यह प्रीति, प्रभु चरणों में “राहत”, बसती रहे भक्ति॥ ” राहत टीकमगढ़”

कृत्रिम बुद्धिमत्ता: सुविधा का वरदान या मूल्यों का संकट

मानव सभ्यता के विकास का इतिहास यदि देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि हर नई तकनीक अपने साथ संभावनाओं और संकटों का एक द्वंद्व लेकर आती है। आज का समय भी इसी द्वंद्व से गुजर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के रूप में विकसित हो रही नवीन तकनीक ने जीवन को सरल, तीव्र और … Read more

दरवेश

बहुत   खुश   होगा  दुनिया  बनाने  वाला। बहुत    रोया    सबको    हंसाने    वाला।। मुद्दत  से  ढूंढ  रहे  यार  हम  अपनों  को। काश वो  मिल जाए  रिश्ते बनाने  वाला।। केसे   गुजरे   हैं   मेरे   शाम   ओ   सहर। काश जान भी ले सच सितम ढाने वाला।। बेवफा  कहकर  जो  रुसवा  करता  रहा। मिलना नही  हम सा … Read more

अक्षय तृतीया पर्व है लोक से लोकोत्तर की दिव्य यात्रा

अक्षय तृतीया- 19 अप्रैल, 2026 अक्षय तृतीया महापर्व का न केवल सनातन परम्परा में बल्कि जैन परम्परा में विशेष महत्व है। इसका लौकिक और लोकोत्तर-दोनों ही दृष्टियों में महत्व है। अक्षय शब्द का अर्थ है कभी न खत्म होने वाला। संस्कृत में, अक्षय शब्द का अर्थ है ‘समृद्धि, आशा, खुशी, सफलता’, जबकि तृतीया का अर्थ … Read more

मांगलिक कार्यो को आरंभ करने का अबूझ मुहूर्त है -अक्षय तृतीया

परशुराम जयन्ती भी मनायी जाती है धूमधाम से ऐसा दिन जिसका सभी बेसर्बी से इंतजार करते है वह है – अक्षय तृतीया का दिन। यही ऐसा अबूझ मुहूर्त है जिसमें हर सामान्य नागरिक अपने शुभ कार्य निपटाना चाहता है। इस दिन से ब्याह-परिणय करने का आरम्भ हो जाता है। बड़े-वृद्ध अपने पुत्र-पुत्रियों के लगन का … Read more

‘वात्सल्य पीठ’: करुणा, साधना और आत्मोन्नति का दिव्य तीर्थ

दिल्ली जैसे महानगर की आपाधापी, भागदौड़ और संवेदनहीनता के बीच यदि कोई ऐसा स्थान निर्मित हो, जहाँ पहुंचते ही मन शांत हो जाए, आत्मा को विश्राम मिले और जीवन को एक नई दिशा का बोध हो, तो निश्चय ही वह स्थान साधारण नहीं, बल्कि दिव्यता का स्पंदित केन्द्र होता है। ‘वात्सल्य पीठ’ ऐसा ही एक … Read more

हमारी यह पेंशन

देकर अपनी जवानी के बहुमूल्य वो सारे पल खरीदीं है हमने थोड़ी सी सरकार की पेंशन, वृद्ध अवस्था में अपने चाहे साथ दे या ना दे हमें भूखें रखते नहीं कभी, हमारी यह पेंशन। दुनियां चाहे जो भी कहे पेंशन के बारे में पर पेंशन धारकों के लिए सर का ताज है पेंशन, औरों के … Read more

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