जीना है तो गेंहू छोड़ दो

आज से ही सब छोड़ दो यह गेंहू की रोटिया खाना, नही तो यारो पहुंचा देगा यह सभी को सफाखाना। खा खाकर जिससे सब लोग आज बढ़ा रहे है तोंद, जीना है तो गेंहू छोड़ दो सब मानो हमारा कहना।। मोटापा-डायबिटीज बढ़ रहा है इससे हृदय के रोग, आज मिक्स अनाज खाकर रहो आप सब … Read more

मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू

 मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू, मेरी ख़ामोशी का हर राज़ तू, तुझसे ही चलती है ये धड़कन, मेरे होने का एहसास तू तेरे बिना सब फीका सा लगे, जैसे कोई सपना अधूरा लगे, तू जो मिले तो रंग भर जाएँ, वरना हर पल बस धुंधला लगे तू पास आए तो दिल ये कहे, अब और कुछ भी ज़रूरी ना रहे मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू, मेरी ख़ामोशी का हर राज़ तू, तुझसे ही जुड़ी मेरी हर कहानी, मेरे जीने की हर वजह तू तेरे ख्यालों में बहता रहूँ, तेरे साथ ही ठहरता रहूँ, तू जो मिले तो सब मिल जाए, तेरे बिना क्यों जीता रहूँ जब तू साथ है तो कमी क्या है, तेरे बिना हर खुशी अधूरी सी है मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू, मेरी रूह का गहरा राज़ तू, तुझमें ही सिमटा मेरा हर सफर, मेरी दुनिया, मेरा आज तू “राहत टीकमगढ़”

सूरों की आशा बनकर गूंजती रहेगी आशा भोसले

भारतीय संगीत का आकाश आज कुछ अधिक मौन, कुछ अधिक रिक्त प्रतीत होता है। स्वर की वह चंचल चिड़िया, जन-जन को चमत्कृत करने वाली आवाज जिसने दशकों तक हर हृदय में मधुरता के बीज बोए, आज भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच न हो, पर उसकी गूंज अनंत में विलीन होकर भी अमर बनी … Read more

सुपारी: भारतीय संस्कृति की अमिट पहचान- ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश पांडे

भारत में जब भी त्योहारों और शादियों का मौसम आता है, तो पूरा देश रंगों, संगीत और परंपराओं से सराबोर हो जाता है। इन उल्लासपूर्ण आयोजनों के बीच एक छोटी-सी चीज़ अक्सर अनदेखी रह जाती है – सुपारी। यह साधारण-सा बीज वास्तव में भारतीय संस्कृति का एक गहरा प्रतीक है, जो सदियों से हमारे धार्मिक और … Read more

समानता और न्याय के अग्रदूत: डॉ. अंबेडकर की विचारधारा आज भी प्रासंगिक

14 अप्रैल डॉ.भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष लेख 14 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था, जिन्हें पूरे देश में बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है। वे भारतीय संविधान के निर्माता, महान समाज सुधारक, न्यायविद, अर्थशास्त्री और दूरदर्शी नेता थे। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक गाथा है। डॉ. अंबेडकर … Read more

प्रतिभा के पुंज — डॉ. भीमराव अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर जयंती पर विशेष सन 1930 में लंदन में आयोजित गोलमेज कॉन्फ्रेंस में शेर की तरह दहाड़ते हुए एक युवक ने कहा ‘‘अंग्रेजों पहले तुम भारत छोड़ो‘‘। युवक के मन में देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाने एवं वहां रह रहे दलितों के जीवन स्तर को सुधार कर सभी लोगों को समान … Read more

स्मृति शेषः आशा जी की मधुर और सुरमयी आवाज सदा दिलों में अमर रहेगी

आशा भोंसले जी का नाम भारतीय संगीत इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने करियर में आठ दशकों से भी अधिक समय तक संगीत जगत में अमूल्य योगदान दिया है और लगभग 12 हजार से अधिक गीतों को अपनी मधुर आवाज से सजाया है। आशा भोंसले जी, जो भारत की महानतम और दिग्गज गायिकाओं … Read more

गीत

कभी  यूंही  मेरे  मीत,  छत  पर  आया   करो। ये   प्रेमी  नादान  है,   इसे  न  सताया  करों।। आँख टिकी हैं लोगो की,प्रिये हम पर हरदम । हाथ हिलाया करो सदा, तुम मुस्कराया करो।। मीठे  ख्याल है  काफी, जिंदगी  कट जाएगी। कभी पास आ नजर से,नजर मिलाया करो।। गर सच्चा  प्रेम हो न हो, मीत  हमें  गम … Read more

बंगाल को बचाने का विकल्प : वाम मोर्चे का घोषणा-पत्र 2026

*केवल वादों की सूची नहीं, बल्कि बंगाल के पुनर्निर्माण का व्यावहारिक खाका है।*   – केशव कुमार भट्टड़   कोलकाता। पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वाम-लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष शक्तियों ने “बंगाल को बचाने के लिए” घोषणा-पत्र जारी किया है। यह दस्तावेज़ राज्य में व्याप्त अराजकता, लूट, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति का स्पष्ट विकल्प … Read more

ज्योतिबा फुले जयंती: समानता की अधूरी लड़ाई और हमारी जिम्मेदारी

11 अप्रैल का दिन भारतीय समाज के लिए सिर्फ एक जयंती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह दिन हमें ज्योतिराव गोविंदराव फुले के उस संघर्ष की याद दिलाता है, जिसने सदियों से जकड़े हुए समाज को सवालों के कटघरे में खड़ा किया। ज्योतिबा फुले ने केवल अन्याय का विरोध नहीं किया, बल्कि एक वैकल्पिक, … Read more

किशोर आक्रामकता एवं हिंसा पर अंकुश लगाने की पहल हो

भारतीय किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। पिछले कुछ समय से किशोरों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं खौफनाक है। चिंता का बड़ा कारण इसलिए भी है क्योंकि जिस उम्र में किशोरों के … Read more

error: Content is protected !!