जीने का हुनर ही है अस्ल तालीम

नज़रें तो आसमान पर रखते हो, ये क्या, एक ठोकर से डरते हो। जीने का हुनर ही है अस्ल तालीम, मरने से पहले ही क्यों मरते हो। हम समंदर पीने का हुनर रखते हैं, एक जाम की क्या बात करते हो। शक्ल है तुम्हारी आदम-जात की, हरकत से हैवान-से लगते हो। माना कि गुलों से … Read more

*हर युवा देश की ताकत है। तुम जो भी करोगे, वह भारत को नया स्वरूप देगा – स्वामी विवेकानंद*

स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष लेख *उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो – स्वामी विवेकानंद* स्वामी विवेकानंद के विचार जीवन में सफलता के मूलमंत्र है। उन्होंने अपने जीवन-काल में युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण विचार प्रकट किए, जिनके माध्यम से युवा सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकता है। उनका … Read more

“ज्वाला से चेतना तक”

(स्वामी विवेकानन्द जयंती-12 जनवरी 2026 : राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष काव्य-रचना) कलकत्ता की धरती से उठा, नरेन्द्र एक ज्वाला बनकर जगा। तर्क की आँखों में प्रश्न लिए, हृदय में शिव का दीप जला। माँ की भक्ति, पिता का विवेक, संस्कारों ने गढ़ा महान स्वरूप। शास्त्र, संगीत, दर्शन, विज्ञान, सबमें था उसका अद्भुत रूप। रामकृष्ण के चरणों में झुका, अहं का बंधन वहीं पिघला। गुरु-सेवा में स्वयं को खोकर, उसने जग को स्वयं से जोड़ा। केसरिया वस्त्र, नंगे पाँव, भारत की धूल बनी पहचान। ग्राम-ग्राम में पीड़ा देखी, दुखियों में देखा भगवान। शिकागो की सभा में गूँजा स्वर, “मेरे अमरीकी बहनों और भाइयों!” सहिष्णुता का शंखनाद हुआ, मौन हुए धर्म के सारे द्वंद्व-छल। नदियाँ जैसे सागर में मिलतीं, वैसे ही सब पथ एक हैं। यही वेदान्त, यही संदेश, यही मानवता का सच है। युवकों से थी उसकी आस, उठो, जागो—यही पुकार। सेवा ही धर्म, मानव ही ईश्वर, यही था उसका जीवन-सार। अल्प आयु, पर कार्य अनन्त, युगों तक गूँजेगा नाम। विवेकानन्द नहीं, वह चेतना है, भारत की आत्मा, विश्व का प्रणाम। रचियता/लेखक – डॉ.  ब्रह्मानंद राजपूत (Dr. Brahmanand Rajput) On twitter @33908rajput On facebook … Read more

राष्ट्रीय युवा दिवस : चरित्र, चेतना और परिवर्तन का संकल्प

12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जयंती -बाबूलाल नागा    भारत जैसे युवा देश के लिए 12 जनवरी केवल एक तिथि नहीं है। यह वह दिन है जब देश अपने सबसे प्रेरक विचारक, महान संन्यासी और युवाओं के पथप्रदर्शक स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाता है। यह दिवस औपचारिक कार्यक्रमों या भाषणों तक सीमित नहीं होना … Read more

दुुनिया में मंदीः भारत में आर्थिक मजबूती की रोशनी

वैश्विक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनावों, युद्धों, महामारी के पश्चात् बनी अस्थिरताओं, ऊर्जा संकट, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और महँगाई के दबावों के बीच जब दुनिया की अनेक बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ लड़खड़ा रही हैं, तब भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आँकड़े आशा, भरोसे और आत्मविश्वास की एक सशक्त किरण बनकर उभरे हैं। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के नए … Read more

विश्व में हिन्दी की बढ़ती साखः भारत में उपेक्षा क्यों?

विश्व हिंदी दिवस- 10 जनवरी 2026 हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक या प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हिंदी भाषा की वैश्विक यात्रा, उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा, उसके सामने उपस्थित चुनौतियों और हमारे अपने राष्ट्रीय आचरण की विडंबनाओं पर गहन चिंतन का अवसर है। यह दिन हमें … Read more

समाज सुधारक युग प्रवर्तक हिंदू सम्राट स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी ने कहा कि जीवन में हमारे चारो ओर घटने वाली छोटी या बड़ी, सकारात्मक या नकारात्मक सभी घटनायें हमें अपनी असीम शक्ति को प्रकट करने का अवसर प्रदान करती है। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था  “जिसके जीवन में ध्येय या संकल्प नहीं है तो ऐसा आदमी  खेलती गाती, हँसती बोलती लाश ही … Read more

दूषित पानी से मौतें: जवाबदेही तय करने में नीति क्यों चूकती है?

-बाबूलाल नागा    भारत में पानी को जीवन कहा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि आजादी के 78 साल बाद भी यह जीवन हर नागरिक के लिए सुरक्षित नहीं हो पाया है। भारत में स्वच्छ पेयजल को लेकर नीति और अधिकार के बीच की खाई आज भी बनी हुई है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार … Read more

विश्व पटल पर बालिकाओं का नवयुगः बदली सोच, उभरी शक्ति

एक समय था जब दुनिया के बड़े हिस्से में बेटी का जन्म बोझ समझा जाता था। गर्भ में ही उसके जीवन का अंत कर दिया जाता, या जन्म के बाद भेदभाव, उपेक्षा और वंचना उसका भाग्य बनती। सदियों तक चली इस दकियानूसी एवं पुरानपंथी सोच ने समाज, सभ्यता और प्रकृति-तीनों को गहरे घाव दिए। किंतु … Read more

मासूमों का बचपन जंक फूड के हवाले क्यों ?

-बाबूलाल नागा    हाल में उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 11वीं की एक छात्रा की कथित तौर पर लगातार जंक फूड खाने से मौत हो गई। अहाना नाम की छात्रा के पेट में इन्फेक्शन हो गया था। लोकल अस्पताल में इलाज के बाद उसे दिल्ली एम्स रेफर किया गया था। वहां उसने दम तोड़ दिया। अहाना की मौत कोई साधारण हादसा … Read more

वेनेज़ुएला संकटः अमेरिकी निरंकुशता और वैश्विक कानूनों का हनन

वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वास्तव में नियम-कानूनों से संचालित होती है या फिर ताकतवर राष्ट्रों की इच्छा ही वैश्विक न्याय का नया मानदंड बन चुकी है। निश्चित तौर पर वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमला महाशक्तियों … Read more

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