सुल्तान हूँ मैं….
देख कर मंज़र बहुत हैरान हूँ मैं कुछ परिंदो मे बची अब जान हूँ मैं होगा कैसे अब मिलन मेरा तुम्हारा तुम कठिन हो और बहुत आसान हूँ मैं वक़्त का इस से भी ज़्यादा अब करम क्या हर तरफ है भीड़ और वीरान हूँ मैं धारा मे दुनिया की बहकर रंग बदलना अगर है … Read more