केवल कर्म करना ही मनुष्य के अधिकार में है

केवल कर्म करना ही मनुष्य के अधिकार में है (गीता 2-47) – इस श्लोक का अर्थ वापस समझें !सामान्य अर्थ है – कर्म करने में ही तेरा अधिकार है, फल पर बिल्कुल नहीं । तू फल के विचार से कर्म करते हुए खुद ही कर्मफल भोगने का कारण मत बन और कर्म करने से मत … Read more

फोडा घणी घालै!

हास्य-व्यंग्य दिल्ली के चांदनी चौक इलाके, फतेहपुरी में फुटपाथ पर कुछ छोटे छोटे दुकानदार बैठते हैं, जो फटे-पुराने नोटों को बदलने का व्यवसाय करते हैं। आजकल उन्होंने अपनी अपनी दुकानों पर “यहां जख्मी एवं सीनियर नोट बदले जाते हैं” के बोर्ड लगा दिए हैं। इससे उनका धंधा भी चल निकला हैं। दिल्ली में ही जूतों … Read more

तिरुपति में प्रसादम से खिलवाड़ आस्था पर आघात

लाखों-करोड़ों हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र तिरुमाला भगवान वेंकटेश्वरस्वामी मंदिर में मिलने वाले लड्डू वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल की शर्मनाक एवं लज्जाजनक घटना ने न केवल चौंकाया है बल्कि मन्दिर व्यवस्था पर सवाल खड़े किये हैं। यह मामला जितना सनसनीखेज है, उतना ही … Read more

दुनिया में अमनचैन, अयुद्ध एवं शांति का उजाला हो

अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस- 21 सितम्बर, 2024 अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, अहिंसा, सह-जीवन, शांति और खुशी का एक आदर्श संकल्प माना जाता है। यह दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए मनाया जाता … Read more

हर निवाले की बचत जरुरी….

– अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार) “भोजन का सही सम्मान उसकी बर्बादी न करके और उसे प्रेम से ग्रहण करके किया जाता है।” भूख हमारे देश की एक बड़ी समस्या है, जिससे आजादी के 78 सालों बाद भी हम पूरी तरह निजात नहीं पा सके हैं। हमारे देश में रोज करीब 20 करोड़ लोग … Read more

लेखन मात्र कमाई का जरिया नहीं _

अब जब नोटफ्री आंदोलन के ज़रिये इस विषय पर ज़ोरदार चर्चा छिड़ चुकी है और आंदोलन के समर्थकों द्वारा बहुत आक्रामक और उपहासपूर्ण स्वर में इस विषय में तर्क दिए जा रहे हैं तो इसके कुछ और केंद्रीय आयामों पर बात कर लेना चाहिए। यहाँ पर सबसे बुनियादी प्रश्न यह है कि लेखक क्यों लिखता … Read more

बचपन से ही दें सपनों को उड़ान…..

-अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार) बचपन वह दौर होता है जब मन और मस्तिष्क एक खाली कैनवास की तरह होते हैं, जिस पर हम किसी भी रंग से तस्वीर उकेर सकते हैं। इसी समय में बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझते हैं, नई चीजें सीखते हैं और नई-नई आकांक्षाओं को आकार देते हैं। … Read more

कैसे संगीत ने दुनिया को खुशियों का वरदान दिया

इस लेख के लेखक स्वर सम्राट जज के पी सक्सेना है – संगीत, जिसे हम भावनाओं की सबसे सशक्त भाषा मानते हैं, हमेशा से दुनिया में खुशियों का स्त्रोत रहा है। चाहे भारतीय शास्त्रीय संगीत हो या पॉप संगीत की पश्चिमी धुनें, हर युग और हर संस्कृति में संगीत ने लोगों के जीवन को संजीवनी … Read more

*भाजपा की सोच से भी सयाने निकले केजरीवाल*

*जमानत मिलते ही इस्तीफे की घोषणा कर खुद को राजनीति का शातिर खिलाड़ी साबित किया* ———————————– *■ ओम माथुर ■* *भारतीय जनता पार्टी ने जितना सोचा था अरविंद केजरीवाल राजनीति के उससे ज्यादा शातिर खिलाड़ी निकले। दिल्ली शराब नीति केस में गिरफ्तारी के 177 दिन बाद 13 सितंबर को जमानत मिलने के बाद उन्होंने दो … Read more

दावत (नंढी कहाणी)

लेखिका: देवी नागरानी अनुवाद: पदमा गोविंद मोटवानी ‘नमस्ते जी’ फ़ोन जो रिसीवर खणंदे ई आवाज़ु बु॒धो। ‘नमस्ते अंकुर जी, तव्हां कीअं आहियो?’ मूं अदबी तौर ते पुछी वरितोमांसि। “तव्हां खे हिक विनती हुई मैडम, अगि॒ले आरितिवार ते असांजो सालियानो मुशायिरो आहे ऐं उन में तव्हांजो नालो दर्जु कयो वियो आहे । पूरे चईं बजे पहुंची … Read more

ब॒ फुट ज़मीन घुरिजे (नंढी कहाणी)

लेखिका: देवी नागरानी अनुवाद: पदमा गोविंद मोटवानी सुधा पंहिंजी साहिड़ियुनि साणु कार ड्राइव जो मज़ो वठंदी वणंदर वक़्त खे भरपूर माणे रही हुई। आक्टोबर जो महीनो, कार जा शीशा बंदि, साजे॒ खाबे॒ बि॒न्ही पासे मीलनि ताईं इंडिलठी रंगनि जे गुलनि सां पखिरियल शिकागो जी सुहिणी सावक मन खे मोहे रही हुअसि। मदहवासु करण वारी सूंहं … Read more

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