सम्यक्त्व दीक्षा कार्यशाला का आयोजन
गंगाशहर। आत्म शुद्धि का साधन ही सच्चा धर्म है। त्याग में धर्म है भोग में नहीं। लौकिक धर्म और अलौकिक धर्म अलग-अलग है। अरिहन्त मेरे देव है, जिनेश्वर देव द्वारा घोषित धर्म मेरा आत्म धर्म है। यह विचार तेरापंथ भवन में आयोजित सम्यक्त्व दीक्षा कार्यशाला में मुनिश्री सुमतिकुमार जी ने कही। उन्होंने कहा कि जो … Read more