क्या पक्षियों से बात करना संभव है?

पुराणों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में पक्षियों से संवाद के कई प्रसंग मिलते हैं। वैज्ञानिक चिंतन के अनुसार ऐसा संभव नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि पक्षियों की बोली को आध्यात्मिक, प्रतीकात्मक एवं कभी-कभी मनोवैज्ञानिक दृष्टि से समझा जाता है। प्राचीन काल में पक्षियों को संदेशवाहक, देवदूत या भविष्यवक्ता के रूप में भी … Read more

शवदाह के बाद पीछे मुड़ कर क्यों नहीं देखते?

आपको जानकारी होगी कि षव का अंतिम संस्कार करने के बाद पीछे मुड कर न देखने की सलाह दी जाती है। क्या आपने सोचा है कि इसकी वजह क्या है? इस बारे में गरूड पुराण में कहा गया है कि जब षव को अग्नि के हवाले करने के बाद नाते-रिष्तेदार लौट रहे होते हैं तो … Read more

शुभ-अशुभ का संकेत जानने के लिए डाली जाती है फार

सिंधी समाज सहित कुछ अन्य समाजो में किसी घटना-विशेष का फलित यानि शुभ-अशुभ संकेत जानने के लिए एक पारंपरिक विधि अपनाई जाती है, उसे प्रायः “फार डालना” कहा जाता है। कुछ स्थानों पर इसे “देव-फार”, “शकुन-फार” या केवल “फार” कहा जाता है। फार वस्तुतः एक प्रकार की दैव-प्रश्न या शकुन-प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से यह … Read more

महान लोगों की उम्र कम क्यों होती है?

शिखर पर पहुंचने वाले, चाहे वे महान कलाकार हों, उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक या आध्यात्मिक नेता हों, हम अक्सर देखते हैं कि उनमें से कई अपेक्षाकृत कम आयु में ही संसार छोड़ देते हैं। यह प्रश्न मन को झकझोरता है, लेकिन इसका उत्तर भाग्य या दैवी न्याय से अधिक मानव-जीवन, मनोविज्ञान, शरीर विज्ञान और सामाजिक दबावों … Read more

दाल-बाटी-चूरमे की खोज कैसे हुई?

राजस्थान की पहचान यदि किसी एक व्यंजन से की जाए, तो दाल-बाटी-चूरमा का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि इतिहास, संघर्ष और लोकबुद्धि का सजीव उदाहरण है। बहुत कम लोग जानते हैं कि बाटी का जन्म किसी रसोई में नहीं, बल्कि रणभूमि की तपती रेत पर हुआ था। इतिहासकारों और लोकपरंपराओं … Read more

चैट जीपीटी से मौलिक लेखकों पर संकट?

इन दिनों चैट जीपीटी का बोलबाला है। लेखन से लेकर शोध तक, हर क्षेत्र में इसका प्रयोग तेजी से बढ़ा है। खासकर किसी विषय पर आलेख तैयार करने के लिए लोग केवल एक हेडिंग देते हैं और क्षण भर में तैयार लेख प्राप्त कर लेते हैं। वस्तुतः चैट जीपीटी इंटरनेट पर उपलब्ध तथ्यों, सूचनाओं और … Read more

पैर हिलाना व चाबी को घुमाना अशुभ?

आपने देखा होगा कि अमूमन कई लोग पलंग या कुर्सी पर बैठे हुए पैर हिलाते हैं या अंगुली में चाबी घुमाते हैं। भारतीय परंपरा में इसे अषुभ माना जाता है और ऐसा न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसे वैज्ञानिक दृश्टि से प्रमाणित नहीं माना जाता, मगर लोकविश्वास, शिष्टाचार और मनोवैज्ञानिक दृष्टि इसके … Read more

क्या खुशबूदार अगरबत्ती से भगवान प्रसन्न होते हैं?

आमतौर पर जब भी हम अगरबत्ती या धूप खरीदते हैं तो यह ख्याल रखते हैं कि हमें कौन सी खुशबूू पसंद है? भाव भले ही भगवान को प्रसन्न करने का हो, मगर खुशबूू का चयन अपनी पसंद के अनुसार ही करते हैं। हाल ही किराने के दुकानदार से जब अगरबत्ती खरीद रहा था तो उसने … Read more

क्या मृतात्मा को बुलाया जा सकता है?

यह कौतुहल लंबे समय से बना हुआ है कि क्या मृतात्मा को बुलाया जा सकता है या क्या मृतात्मा से बात की जा सकती है? इसका उत्तर धर्म, आध्यात्म, और विज्ञान, तीनों दृष्टियों से अलग-अलग है। लगभग सभी धर्मों में माना गया है कि मृत आत्मा को बुलाना या उससे संपर्क करने की कोशिश नहीं … Read more

नेत्रहीन अमूमन अच्छे गायक क्यों होते हैं?

आपने देखा होगा कि नेत्रहीन की कोई न कोई इन्द्री अधिक सक्रिय होती है। खासकर कंठ यानि स्वर इंन्द्री। नेत्रविहीन अमूमन बहुत सुमधुर गायक होते हैं। इसके अनेक उदाहरण मौजूद हैं। यह सार्वभौमिक नियम तो नहीं है, लेकिन कई नेत्रहीन लोग आवाज की बारीकियों को गहराई से सुन पाते हैं। उनका सारा ध्यान स्वर-इंद्री पर … Read more

घड़ी को कभी नहीं रुकने दीजिए

दोस्तो, नमस्कार। दीवाल घड़ी व हाथ घड़ी की सुई का रुक जाना वास्तु-शास्त्र, ज्योतिष और लोक-मान्यताओं में एक विशेष संकेत माना गया है। यह पूरी तरह आस्था पर आधारित विषय है, पर लोगों के अनुभवों में इसका एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़ा होता है। वास्तु के अनुसार घड़ी समय, ऊर्जा के प्रवाह और जीवन की … Read more

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