पापा अब आप भी साईकिल रिक्शा ले लो

हास्य-व्यंग्य
रिक्शावालें की लडकी सिल्वर मैडल लाई.
रिक्शावाले का लडका I.A.S बना.
रिक्शावालें की बेटी के 99 परसेंट मार्क्स आयें. आदि 2.

शिव शंकर गोयल
जब से अखबारों में देश के अलग अलग स्थानों से उपरोक्त आशय की खबरे छपी है तभी से उन्हें पढकर घर में बच्चें रोज ही यह जिध्द कर रहे है कि पापा अब आप भी रिक्शा लेलो. क्या करें ? बच्चों की बात तो माननी ही पडेगी. यही समय का तकाजा है.
मुझें वर्षों पहले की घटनाएं य़ाद आरही है जब बच्चें छोटे थे. मैंने उनको साईकिल दिलवाई थी और आज वह उसके बदले मुझें साईकिल रिक्शा दिलाने की कह रहे है. पहले बच्चें मां-बाप का कहा मानते थे अब मां-बाप उनके कहे में चलते है. उन दिनों बहुएं सास के सामने चूं नही कर सकती थी आज सास का क्या हाल है, आप देख ही रहे है. पहले स्कूलों में विद्यार्थी मास्टरों से डरते थे अब मास्टर बच्चों से डरते है.
उन दिनों ऑफिसों में कर्मचारी ऑफिसर के कहे में चलते थे आज ऑफिसर को कर्मचारियों के कहे अनुसार चलना पडता है. सामाजिक रीति-रिवाजों को ही देखलें पहले शादी-विवाह में वर-पक्ष बारात लेकर लडकीवालों के शहर-गांव जाते थे, अब लडकी अपने पीहरवालों को लेकर लडके के शहर-गांव पहुंच जाती है और तो और पहले अंगूठा मना करने के लिए दिखाया जाता था अब प्रशंसा करने के लिए दिखाया जाता है कहने का तात्पर्य यह कि उलटबासी का जमाना आगया है.
कोरोना काल तो इसमें करेला और नीम चढा हो रहा है. जो सज्जन है वह या तो घर में छुपा बैठा है या घर के काम-धंधें निबटा रहा है और बाहर निकलता है तो मुंह ढंककर निकलता है और दूसरें लोग किसी नियम कायदें को नही मान रहे है. इसी तरह जो अपने है लोग उनसे भी दूर से ही दुआ- सलाम कर रहे है कही कुछ मांग ना लें.
आपसे क्या छुपा है ? थूकने की भी मना है. जो लोग धोखा-धडी, झूठ-फरेब, व्यभिचार में लगे है, कोरोनाकाल में भी सरकारें गिराने, सत्ता हथियाने, विधायकों की खरीद-फरोख्त में लगे है उन पर भी थूकने नही दिया जा रहा है. कहते है कि थूकोगें तो जुर्माना देना पडेगा. इसमें भी डबल स्टैन्डर्ड. दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन के बाहर एक बोर्ड लगा है जिसमें इंगलिश में लिखा है कि थूकने पर 500 रू. फाईन और हिन्दी में लिखा है कि थूकने पर 1000 रू.जुर्माना. है ना मजेदार बात ?
इसलिए खुदा न खास्ता मेरे को रिक्शा मिल ही गया तो फिर तो बच्चों के मार्क्स 100 प्रतिशत नही तो 99 प्रतिशत तो आही जायेंगे जबकि हमारे समय में तो इतने मार्क्स हम तीन विद्यार्थी बांट लेते थे, आपस में भाई-चारा जो था. लगता है कि इस बार जंम दिवस पर यही भेंट मिलेगी.

शिव शंकर गोयल

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