तुम Bachelor of Humour & Satire क्यों नही कर लेते ?

हास्य-व्यंग्य

शिव शंकर गोयल
जब एम.ई की डिग्री हासिल हुई तो मैं अपने HOD से मिलने गया. बातचीत में उन्होंने मुझसे कहा कि अब तुम PHD क्यों नही कर लेते ? मैंने कहा कि सर ! उससे क्या फायदा होगा ? तो वह बोले तुम बनिए हो, हर बात में नफा-नुकसान देखते हो. उसी समय मुझें हमारे पडौसी की बात याद आगई. उनका नाम रामस्वरूपजी शर्मा था और वह हिन्दी में एम.ए थे. कॉलेज में पढाते थे. घर के बाहर नाम की प्लेट लगा रखी थी. बादमें उन्होंने सूर, तुलसी, केशव आदि के भक्ति साहित्य पर पीएचडी करली और अपने घर के बाहर नेम प्लेट पर नाम के साथ डा. और लिखवा लिया. अब जैसे ही गली-मोहल्ले में पता लगा, लोगों ने आना शुरू कर दिया. अब सुबह देखे न शाम, हर कोई सर्दी-जुखाम. सिरदर्द, पेटदर्द की दवा लेने आ रहा है. डाक्टर साहब किस किस को समझायें ? हार-थक कर उन्होंने पूरी नेम प्लेट ही उतारली. मैं भी यही घटना याद करके उस समय चुप होगया.
फिर कुछ दिनों बाद किसी विद्वान ने सुझाया कि आप B. (H&S)यानि बैचलर ऑफ ह्यूमर एन्ड सटायर क्यों नही कर लेते ? मैंने उन्हें कहा कि post Graduation के बाद Graduation करने लगूंगा तो लोग कहेंगे B.A करके Metric करना चाहता है ? इस पर वह बोले कि इसमें क्या हर्ज है ? जब मध्य प्रदेश में श्री बाबूलालजी गौड मुख्य मंत्री बनने के बाद वही पर मंत्री बन सकते है तो बाकी लोग बीए के बाद मैट्रिक क्यों नही कर सकते ? इतना ही नही देश के कई बडे बडे नेताओं ने भी पहले बीए करके फिर मैट्रिक की है. आजकल लोग Live in relation में पहले रहने लगते है, उनके बच्चें हो जाते है, उसके बाद शादी करते है. मेरे को उनकी बात जंच गई और अब मैं B.(H&S) यानि हास्य-व्यंग्य में डिग्री करने की सोच रहा हूं.

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