
मौनी अमावस्या का महत्व
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जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है मौनी अर्थात् मौन। इस अमावस्या के दिन मौन रहकर व्रत-पूजन किया जाता है। मौन रहकर भगवद्भक्ति करने से मनुष्य की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। सत्कर्मो का उदय होता है और अंत:करण का शुद्धिकरण होता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन सृष्टि के संचालक मनु का जन्म हुआ था इसलिए भी इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है।
4 घंटे 4 मिनट रहेगा अति पुण्यदायक महोदय योग
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1 फरवरी को सूर्योदय प्रात: 7.11 बजे से लेकर प्रात: 11 बजकर 15 मिनट तक अमावस्या तिथि, श्रवण नक्षत्र और व्यतिपात योग का संयोग होने से महोदय नाम का योग बन रहा है। यह योग कुल 4 घंटे 4 मिनट रहेगा। यह योग अति पुण्यदायक होता है। इस योग में किसी तीर्थस्थल पर जाकर स्नान, पूजन, दान-पुण्य करना एक करोड़ सूर्यग्रहण के समय किए गए दान के समान शुभ फल देता है। शास्त्रों का वचन है कि महोदय योग में सभी नदियों व सरोवर का जल गंगाजल के समान होता है। इस दिन मौनी भौमवती अमावस्या होने से प्रयागराज में स्नानादि करना महापुण्यप्रद है। गंगा के अलावा नर्मदा, क्षिप्रा, गोदावरी आदि पुण्य सलिला नदियों में स्नान करना चाहिए।
आर्थिक संकटों से मुक्ति के लिए उपाय
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मौनी अमावस्या के दिन भौमवती अमावस्या का शुभ संयोग बना है। इसलिए इस अमावस्या के दिन अपने जीवन के आर्थिक संकटों का समाधान करने के लिए शास्त्रों में बताए कुछ उपाय अवश्य करें।
मौनी अमावस्या के दिन आंक के 51 पत्ते लेकर इन पर अष्टगंध से श्रीराम लिखें और इसकी माला बनाकर हनुमानजी को पहनाएं। इससे आर्थिक कष्ट कटने लगते हैं।
मौनी अमावस्या के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में मीठा दूध अर्पित करें और सायंकाल आटे से बने 11 दीपक में सरसों का तेल भरकर पीपल के वृक्ष के चारों ओर लगाएं। इससे आर्थिक समृद्धि की राह खुलने लगेगी।
मौनी अमावस्या के दिन शनि देव को तेल अर्पित करने से शनि से जुड़ी पीड़ा दूर होती है।
इस दिन गायों को हरा चारा खिलाने, मछलियों को आटे की गोली खिलाने और पक्षियों के लिए दाने का प्रबंध करने से बहुत पुण्य फल मिलता है।
गरीबों, निशक्तों, दिव्यांगों को इस दिन भोजन करवाने से पुण्य फल प्राप्त होता है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
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