ऋतुराज बसंत का पर्व बसंत पंचमी पार्ट 5

dr. j k garg
सनातनधर्मी लोगों के लिये बसंत पंचमी महत्वपूर्ण पर्व है | अन्नदाता किसानों के लिये भी यह एक प्रमुख पर्व है | सनातनधर्मी इस पर्व को संगीत, ज्ञान, कला, विद्या, वाणी और ज्ञान की देवी सरस्वती के समर्पण के दिन के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं | बसंत पंचमी के दिनों में सरसों के खेत लहलहा उठते हैं इसीलिए लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं |
सम्पूर्ण भारत में माघ शुक्ल पंचमी को “वसंत पंचमी” उत्सव मनाया जाता है।बसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु प्रारंभ होती है | इसे “श्री पंचमी”, ऋषि पंचमी, मदनोत्सव, वागीश्वरी जयंती और “सरस्वती पूजा का उत्सव” भी कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन ही होलिका दहन स्थान का पूजन किया जाता है और होली में जलाने के लिए लकड़ी और गोबर के कंडे आदि एकत्र करना शुरू कर देते हैं। इस दिन से होली तक 40 दिन फाग गायन यानी होली के गीत गाए जाते हैं।

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