वसंत को ऋतुओ का राजा क्यो कहा जाता है।
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वही वसंत को ऋतुओं का राजा इसलिए भी कहा गया हैं क्योंकि इस ऋतु में धरती की उर्वरा शक्ति यानी की उत्पादन क्षमता अन्य ऋतुओं की अपेक्ष अधिक बढ़ जाती हैं यही कारण हैं कि भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं को ऋतुओं में वसंत कहा हैं वे सभी देवताओं और परम शक्तियों में सबसे ऊपर हैं। वैसे तो बसंत ऋतु भी सभी ऋतुओं में श्रेष्ठ मानी जाती हैं।
उत्पत्ति की कथा—
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अंधकासुर नाम का एक राक्षस का वध केवल भगवान शिव के पुत्र से ही संभव था। तो शिवपुत्र कैसे उत्पनन हो तब इसके लिए कामदेव के कहने पर ब्रह्माजी की योजना के मुताबिक वसंत को उत्पन्न किया गया था। वसंत ऋतुब्रह्मा जी ने शक्ति की स्तुति की उसके बाद देवी सरस्वती प्रकट हुई ब्रह्मा और देवी सरस्वती ने सृष्टि सृजन किया। इसलिए वसंत में नए पेड़ पौधे उगते हैं उनमें लगने वाले पुष्पों में कामदेव को स्थान दिया गया।
वसंत ऋतु की विशेषता :
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वसंत ऋतु के समय ऋतु बहोत ही सुहावनी लगती है यानि की बसंत से समय यह ऋतु बहोत ही सुंदर सी लगती है। और यह ऋतु सर्दी खत्म और गर्मी शुरू होने के समय में होती है यानि की यह वसंत ऋतु न तो अधिक गर्मी न ही अधिक ठंडी सामान्य मौसम मे यह ऋतु शुरू होती है।
इस समय हर कोई व्यक्ति या आदमी बाहर घूमने का इच्छुक होता है। या घर के बाहर घूमने का मजा लेना चाहता है। इस तरह की मजा इस ऋतु में आता है और सब जीव-जन्तुओ और पेढ़-पौधे हरे भरे रहते हैं और यह मौसम हर कोई के जीवन में खुशहाली छा देता है और इस समय में किसान भाइयों की खेती मे सरसों मे फूल पीले से दिखते हैं और गेहूँ में हरियाली छाई रहती है। और आम के पेढ़ में छोटे से बड़े तक के फल भी लग जाते हैं। और वृक्षों के नए-नए पत्ते आ जाते हैं।
और फूलों की हरियाली और मन को खुश कर देती है। और आमों के पेढ़ पर बौने आने लगते हैं। और की मीठी सी आवाज कुहू-कुहू की आने लगती है। और इस समय में सैर करने से बहोत सी बीमारियाँ दूर हो जाती है। और ठंडी-ठंडी हवा चलती रहती है जिससे मनुष्य के उम्र के बल में बृद्धि होने लगती है। और वसंत ऋतु पतझड़ के बाद आता है
और कहा जाए या देखा जाए तो वसंत ऋतु फाल्गुन के महीने से शुरू होता है। वसंत ऋतु का मौसम बहोत ही सुहावना होता है। और प्रकृति में चारों तरफ या चारों ओर वसंत का प्रभाव दिखाई देता है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
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