बीकानेर जेल फिर चर्चाओं में, यहीं बना था जैतपुरा को मारने का प्लान

बीकानेर(जयनारायण बिस्सा)। पहले से ही बदनामी का दंस झेल रही बीकानेर की जेल एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार ये चर्चा किसी वारदात को लेकर नहीं बल्कि वारदात को अंजाम देने के लिये बनाई गई योजना को लेकर है। जहां बीकानेर संभाग के बहुचर्चित अजय जैतपुरा की हत्या का षडय़ंत्र रचा गया। जानकारी मिली है कि जैतपुरा की हत्या की साजिश बीकानेर जेल में बंद नामजद आरोपित अनिल गैंग के बंशीलाल व सोनू मीठी ने रची थी। इसकी पुष्टि सादुलपुर पुलिस द्वारा जैतपुरा हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपित संदीप उर्फ कालू ने पुलिस पूछताछ में की। थानाधिकारी भगवान सहाय मीणा के अनुसार गिरफ्तार आरोपित हरियाणा लुहारू थाना क्षेत्र गांव सिंघानी निवासी संदीप कुमार उर्फ कालू जाट ने पूछताछ में बताया कि 25 जून 2015 को हरियाणा के इसरवाल गांव में केहर की ढाणी निवासी अनिल के हुए एनकाउंटर में अजय जैतपुरा का हाथ था। इस बात से अनिल गैंग से आपसी रंजिश हो गई। बदला लेने के लिए जैतपुरा की हत्या की गई है। पुलिस के मुताबिक जैतपुरा हत्या मामले में नामजद आरोपित बैरासर निवासी बंशीलाल व सोनू मीठी ने बीकानेर जेल में घटना को अंजाम देने की रणनीति बनाई थी। इसके बाद मिंटू मोडासिया से संपर्क किया और मोडासिया को इसके लिए तैयार किया। बताया जा रहा है मोडासिया व अनिल से झुझुंनूं जेल में कुछ समय पहले मारपीट भी हुई थी, तभी से मोडासिया रंजिश रखता था। जेल से रिहा होने के बाद बंशी व सोनू के इशारे पर साथियों के साथ मिलकर न्यायालय में घुसकर जैतपुरा की गोली मारकर हत्या की थी।

विद्युत पोल से टकराई कार,एक जिंदा जला
बीकानेर(जयनारायण बिस्सा)। जिले के श्रीडंूगरगढ़ के कीतासर गांव के पास कार में लगी आग में एक जना जिंदा जल गया। जबकि दो अन्य गंभीर रूप घायल हो गये है। जिन्हें पीबीएम में भर्ती करवाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार जिंदा जलने वाला चूरू के वन विभाग कॉलोनी का वांशिदा बताया जा रहा है। जबकि गंभीर रूप से घायल मलकीसर के निवासी है। बताया जा रहा है कि सिफट डिजायर में सवार ये तीनों ही देशनोक की ओर आ रहे थे कि इनकी कार एक विद्युत पोल से टकरा गई। जिसके चलते कार में आग लग गई। इस घटना में एक जना कार में ही जिंंदा जल गया। जबकि दो अन्य जनें जैसे तैसे कार से बाहर निकलने में कामयाब हो गये। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक का शव मोर्चरी में रखवाया है,जबकि घायलों को पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया है। जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इस हादसे में मृतक व घायलों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक में गफलत के आरोप
उठी संचालक मण्डल के चुनाव जल्दी करवाने की मांग
बीकानेर(जयनारायण बिस्सा)। अरबन को-ऑपरेटिव बैंक के बाद अब यहां एक और सहकारी बैंक की गफलत सामने आने वाली है। रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक के सम्बंध में बीकानेर मण्डल के कर्मचारियों की पिछले दिनों बैठक हुई, जिसमें बैंक में हो रही गफलतों पर काफी रोष व्यक्त किया गया। बैठक में मौजूद रेलकर्मियों ने यूनियन के पदाधिकारियों पर मनमानी करने के आरोप लगाए और रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, जयपुर से बैंक के संचालक मण्डल के चुनाव जल्दी करवाने की मांग की।
जानकारी के मुताबिक रेलकर्मियों में इस बात को लेकर रोष है कि कई वर्ष बीतने के बाद भी बैंक की साधारण सभा आयोजित नहीं की गई है। बैंक के सीईओ की नियुक्ति गलत तरीके से हुई है। जबकि बैंक के चुनाव प्रचार के दौरान यूनियन के पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया था कि उन्हें बहुमत मिला तो वे सीईओ को हटा देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि बहुमत आने के बाद यूनियन के पदाधिकारियों ने सीईओ को स्थाई करने के लिए संचालक मण्डल में शामिल अपने सदस्यों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। फिलहाल रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक के संचालक मण्डल में शामिल 12 सदस्यों में से पांच जनों ने इस्तीफा दे रखा है। संचालक मण्डल की मीटिंग कोरम पूरा नहीं होने की वजह से नहीं हो रही है। ऐसे में रेलकर्मियों ने रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक बचाने के लिए लामबंद होते नजर आ रहे हैं।
अपने चहेतों से दिलवाए इस्तीफे
बताया जा रहा है कि रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक के संचालक मण्डल में शामिल कुछ ईमानदार संचालकों ने यूनियन के पदाधिकारियों की मनमानी का विरोध किया तो उन लोगों ने अपने चहेते 5 संचालकों के इस्तीफे दिलवा दिए, मगर रेल के प्रशासनिक अधिकारियों को कह कर उन इस्तीफों को मंजूर भी नहीं होने दिया गया। ऐसी स्थिति में हालात यह हो गए हैं कि 5 संचालक इस्तीफे का बहाना बना कर संचालक मण्डल की मीटिंग में ही नहीं आते हैं। शेष रहे सात संचालक कोरम पूरा नहीं होने की वजह से रेलकर्मियों के हित में कोई निर्णय भी नहीं ले पा रहे हैं।
आरबीआई ने दी थी बैंक को चेतावनी
जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले आरबीआई के नियमों को नहीं मानने पर आरबीआई- जयपुर ने रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक को सोसायटी बना दिए जाने की चेतावनी दी थी। इस बारे में आरबीआई की ओर से बैंक को पत्र भी भेजा गया था। बाद में इस बैंक के कुछ संचालक जयपुर आरबीआई में पेश होकर निवेदन किया। तब कहीं जाकर बैंक में ऋण वितरण का कार्य पुन: शुरू हुआ और बैंक सोसायटी बनने से बच सका।
ये बताई जा रही हैं गफलतें
जानकारी के मुताबिक रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक में कई प्रकार की गफलतें किए जाने के आरोप यूनियन के पदाधिकारियों पर लगाए गए हैं जिनमें
– बैंक के सीईओ की नियुक्ति का अधिकार संचालक मण्डल को है लेकिन इस सीईओ की नियुक्ति अवैध तरीके से दो वर्ष के लिए की गई थी लेकिन संचालक मण्डल के निर्णय के बिना ही यह सीईओ आज तक कार्यरत है।
-बैंक का भवन बैंक ने रेलवे से लीज पर लिया हुआ है, उस बिल्डिंग पर ऊपर के भाग का निर्माण भी बैंक ने अपने पैसों से करवाया। फिर भी सीईओ ने बिना संचालक मण्डल की अनुमति लिए बैंक के खाते से 30 लाख उनतीस हजार सात सौ पन्द्रह रुपए (30,29,715) का भुगतान कर दिया।
-सीईओ की बेपरवाही की वजह से पीएफ विभाग की ओर से 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
– बिना संचालक मण्डल की अनुमति लिए सीईओ ने रंग-पेन्ट के लिए रेलवे को तीन लाख रुपए का भुगतान कर दिया।
– सीईओ की बेपरवाही की वजह से ऋण अधिक बांटने के कारण सीडी रेश्यो सौ प्रतिशत से ऊपर चला गया जो कि सत्तर प्रतिशत के आस-पास रहना चाहिए।
– संचालक मण्डल की मीटिंग में फैसला नहीं होने का कारण बताते हुए सीईओ रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं दे रहा है।
रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक बचाओ आन्दोलन का गठन
28 जनवरी को हुई रेलकर्मियों की बैठक में रेलवे श्रमिक सहकारी बैंक बचाओ आन्दोलन का गठन किया गया। जिसके संयोजक पद पर राजेन्द्र सिंह शेखावत को मनोनीत किया गया। साथ ही इस आन्दोलन को व्यापक बनाने के लिए संगठन की कार्यकारिणी गठित की जा रही है।

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