करोडों की कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में निपट गया पुष्कर का विकास

जमकर भाजपा ने कराए अवैध निर्माण-अरूण पाराशर का आरोप
पुष्कर। नगर पालिका की मौजूदा भाजपा समर्थित शासन ने तीर्थगुरू के स्वरूप को गर्त में उतार दिया है। अवैध निर्माण एवं करोडांे के विकास के नाम पर भाजपा ने कमीशनखोरी और बंदरबंाट का जो अंधाराज पिछले पांच सालों में चलाया है वह विकास के नाम पर बाबाजी का ठल्लू जैसा ही है। भाजपा के विधायक सुरेश रावत 26 सौ करोड रूपए के विकास कार्यो का दावा करते है जबकि वे पवित्र पुष्कर सरोवर में गंदा पानी जाने से नहीं रोक पाए और सीवरेज योजना के नाम पर बरसात के दिनों में बाढ के हालात पैदा कर दिए।

अरुण पाराशर
पुष्कर के सामाजिक कार्यकर्त्ता अरूण पाराशर ने एक मुलाकात के दौरान उपरोक्त आरोप लगाते हुए कहा कि हिन्दूओं के आदी एवं पुराणों मंे उल्लेखित जगतपिता ब्रह्मा के इस तीर्थ का जो हाल भाजपा के शासन में हुआ है वह बहुत ही निंदनीय है क्योंकि भाजपा हिन्दूओं की पार्टी के नाम पर वोट बटोरती है। उनका सवाल था कि विधायक पुष्कर के विकास पर 26 सौ करोड रूपए खर्च करने का दावा करते हैं लेकिन यह राशि कहां खर्च की गयी यह संभवतः उन्हें पता नहीं है। क्योंकि इसमें से अधिकांश रकम बंदरबांट में खर्च की गयी थी। पाराशर का दावा है कि उनके पास हर काम के ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं कि हकीकत एक झटके में सामने आ जाएगी। जिससे भाजपा बोर्ड की जबाव नहीं दे सकेगा। पाराशर का आरोप है कि ब्रह्मा मंदिर के एंट्री प्लाजा के निर्माण पर जिस तरह की ठगी की गयी वह भी कम नहीं है। 24 करोड रूपए की इस योजना पर बिना पुरात्तव विभाग की मंजूरी के काम शुरू करवा दिया गया। मंदिर की समाधियों को तोड दिया गया और केवल सरकार को ओब्लाइज के लिए नियमों की बघिया उघेड दी गयी; अब विभाग ने इस काम पर रोक लगा दी है और निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं साथ ही मामला अदालत तक पहुंच चुका है। पाराशर का कहना है कि पुष्कर में हेरीटेज वाक वे के निर्माण पर 12 की योजना बनी थी किन्तु ठेकेदार सौरभ गुप्ता केवल छह करोड के काम करने के बाद जोधापुर भाग गया। अरूण पाराशर का आरोप है कि प्रसाद योजना के आठ दस साल पुरानी बिल्डिंग को ही हेरीटेज बता कर योजना से लाभांवित करा दिया गया। ऐसे 74 भवनों को चिन्हित किया गया। जबकि कम से कम अस्सी या सौ साल पुराने भवन ही इस श्रेणी में आ सकते है। बाईजी का मंदिर 170 साल पुराना है तो उसे हेरीटेज क्यो नही माना गया। इसके साथ ही अजमेर रोड पर बनी अंनता होटल को लाभ देने के लिए केवल वहीं तक फोर लेन सडक मार्ग का निर्माण किया गया आगे तक मार्ग को विधायकजी ने चौडा क्यों नही कराया।

कहां गए 35 करोड रूपए
पाराशर का कहना है कि भाजपा बोर्ड और विधायक कहते हैं कि पवित्र पुष्कर सरोवर के घाटों के विकास पर 35 करोड रूपए खर्च किए गए। यह राशि कहां खर्च की गयी दिखायी नहीं दे रही है। घाटों में गंदगी व अतिक्रमण का हाल बुरा है। कंुडों की सीढियों पर फिसलन जमा है जिससे यात्रियों के डूबने की आशंका बनी रहती है। घाटों पर पर्याप्त लाइटिंग नहीं है। कई घाटों की सीढियां टूटी हुई है जिसकी मरम्मत कब होगी पता नहीं है भाजपा बोर्ड को। सरोवर का भराव 33 फुट तक है तो 11 फुट पर बिजली के पोल घाटो पर क्यों लगाए गए। बरसात में पानी आने के कारण घाट अंधकार में डूबे है और पानी मंे करंट की आशंका पैदा हो गयी है। क्या विधायकजी या पालिका अध्यक्ष ने इस तरफ ध्यान देने की जरूतर समझी। वे तो सिर्फ अपने आदमियों को ओब्लाइज करने में लगे हैं। यदि 25 करोड भी ईमानदारी से खर्च होते तो काया पलट हो जाती घाटों की।
सीवरेज का पानी सरोवर में
पवित्र पुष्कर सरोवर की मर्यादा व आस्था भाजपा शासन में तार तार हो चुकी है। क्योंकि सीवरेज का गंदा पानी सरोवर के घाटों से सरोवर के जल की पवित्रता को नष्ट कर रहा है। नगरपालिका की भाजपा बोर्ड ने पांच सालों के दौरान इस आस्था को क्यों नही बनाए रखा कि गंदा पानी सरोवर में नहीं जाए। पाराशर का आरोप है कि सीवरेज के नाम पर आयी 16 करोड की राशि कहां खर्च हो गयी। नरसिंहघाट, कुर्माचंलघाट, वराहघाट, जयपुर घाट, सहित अन्य घाटांे से सीवरेज का गंदा पानी पिछले पांच सालों से सरोवर में मिल रहा है। क्या विधायक सुरेशरावत व पालिका अध्यक्ष कमल पाठक को होश नहीं है। घाटों के किनारे बनी अंग्रेजों की होटलों के सेफ्टी टैंक का पानी पुष्कर सरोवर में मिल रहा है क्या किया हिन्दूओं की पार्टी ने, संघ की शाखा चलाने वालों ने, भगवा और ओम का झंडा लेकर रैली निकालने वालों ने। क्या यह हिन्दूओं कीं धार्मिक भावना के साथ विश्वासघात नहीं है रावत साहब। 52 घाटों के सभ्नी रास्ते बंद हो गए

-राजेन्द्र याज्ञिक
अजमेर की मशाल से साभार

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