*उपन्यास ” आवाजों के छायादार चेहरे” का एक अंश ….*
……बच्चों के साथ खेलते-पढ़ते, बड़ों को देखते-सुनते शहर के बीच मोहल्ला बनकर उगा यह गाँव अपने भीतर उतना ही गाँव बचा पाया था जितना स्कूल की सफेद दीवारों पर लिखे संदेशों से स्कूल में महात्मा गांधी, चाचा नेहरू, दयानंद या कबीर बच गए थे। नाना के यहाँ रहते हुए मेरे जहन में गांव का मतलब … Read more