जैन इतिहास में ऐसे श्रावक हुए हैं जिन्होंने अपने प्राणों से ऊपर जीवदया को महत्व दिया जाता रहा हैं- साध्वी धैर्यप्रभा
ब्यावर। बिरद भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में महासाध्वी धैर्यप्रभा ने बताया कि कोई व्यक्ति तब ही याचना करता है जब उसके कोई अभाव हो, या तब याचना करता हैं जब सामने वाला व्यक्ति का कोई प्रभाव हो या व्यक्ति तब याचना करता है जब उसका स्वभाव हो। महासती ने घार के जीरन सेठ … Read more