दुनिया जल के वैश्विक दिवालियापन की ओर बढ़ रही है
“जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। किंतु विडंबना यह है कि जिस जल को हम जीवन का आधार मानते हैं, वही आज सबसे अधिक संकटग्रस्त संसाधन बन चुका है। देश-दुनिया में जल संकट के हालात … Read more