व्यंग्य । कभी खोली घरवाली की वार्षिकोत्सव अलमारी
आपको भी सुन रहा है या मेरे ही कान बज रहें हैं। कहीं दूर देखो कितना मनोरम गरबे का पहला भजन; गरबों रे महाकाली न दीज्यो बज रहा है। अहा । मन भावन भाव-विभोर हो अक्षुधारा बहने ही वाली थी कि अचानक डीजे का मौसम बदल गया। उसके बाद तेज डीजे पर, अंग लगा दे … Read more