अब हृदय सम्माननीय के जुमले से कौन पुकारेगा?
जी हां, हृदय सम्माननीय। वे विशेष रूप से खबरनवीसों और खास लोगों को इसी संबोधन से बुलाया करते थे। दरअसल यह उनका तकिया कलाम हो गया था। दो शब्दों का यह जोड़ उनकी पहचान बन गया। अजमेर में वे इकलौते थे, जो इसका इस्तेमाल किया करते थे। उन्होंने ही इसका इजाद किया था, जो किसी … Read more