कैसे लोकतंत्र दागी राजनीति से मुक्त होगा?

लोकतंत्र में शासनतंत्र की बागडोर जनता द्वारा चुने गए सांसदों एवं विधायकों के हाथों में होती है। भारतीय लोकतंत्र की यह दुर्बलता है कि यहां सांसदों-विधायकों का चुनाव अर्हता, योग्यता एवं गुणवत्ता के आधार पर न होकर, व्यक्ति, दल या पार्टी के धनबल, बाहुबल एवं जनबल के आधार पर होता है। यही कारण है कि … Read more

बलि के बकरे या बकरे की बलि

कहने को तो किसी भी प्रदेश के राज्यपाल महोदय महामहिम कहलाते है लेकिन वास्तव में होते हैं कुर्बानी के दुम्बे (बकरे), हम बात कर रहे हैं खांटी संघी विचार धारा को निरंतर घसीटते रहने वाले संघी श्री राजखोवा जी की जो एक अति संवेदन शील सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल बनाये गए थे ? … Read more

प्रियंका योशीकावा: नस्लभेद मानवता का अभिशाप

जिसमें हम जीते हैं, वह है सभ्यता और जो हममें जीती है वह है संस्कृति। संस्कृति ने अपने जीने का सबसे सुरक्षित स्थान मानव मस्तिष्क, मानव मन एवं मानव शरीर चुना और मानवीय मूल्यों का वस्त्र धारण किया, पर आज मानव उन मूल्यों को अनदेखा कर रहा है, तोड़ रहा है। मात्र संकुचित और संकीर्ण … Read more

अलगाववादियों को सुख सुविधा क्यों ?

एक ओर तो अलगाव वादी नेताओं ने घाटी को नर्क बनाया हुआ है उनके उसकावे पर घाटी में लोग पाकिस्तानी झंडे फहराते है सुरक्षबलों पर पत्थर बरसाते है जिसमे हजारो सुरक्षा बल के जवान घायल हुए है है और हजारों ही नागरिक पैलेट गन से मौत जिंदगी के बीच झूल रहे है । 60 दिन … Read more

रिलायंस के ब्रांड दूत प्रधानमंत्री मोदी

वक्त बतायेगा कि रिलायंस ने प्रधानमंत्री की साख का इस्तमाल किया है या ख़राब कर दिया है। रिलायंस जियो एक विशुद्ध व्यापारिक उद्यम है। उसमें कोई बुराई नहीं लेकिन इस विज्ञापन से क्या हम ये समझें कि रिलायंस अपने मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा सरकार को ट्रांसफ़र करेगा। यह कहा गया है कि जियो प्रधानमंत्री के … Read more

सूफी संतों के मजारों तक महिलाओं का जाना कितना सही कितना गलत?

– मुजफ्फर अली – इस्लाम धर्म में महिलाओं का बराबरी का अधिकार चौदह सौ साल पूर्व उस समय दिया था जब अरब देशों में घरों में बेटी पैदा होने पर नवजात को मार कर दफन कर दिया जाता था। बेटी को पिता की संपत्ति में से हिस्सा लेने का अधिकार, विवाह से पूर्व उसकी इच्छा … Read more

हुकुमरानों की फरियाद

जयपुर के पूर्व राजघराना का परिवार लोकतंत्र में सडक पर उतर आया है। एक दौर था जब जयपुर राजघराने से हुक्म जारी हुआ करता था और राजदरबारी उस पर अमल करते थे और आम जनता उसे स्वीकार करती थी। सोलहवी सदी से लेकर बीसवीं सदी में देश के स्वतंत्र होने से पूर्व तक जयपुर राजघराने … Read more

वाह,केजरीवालजी क्या टीम है !

वाह केजरीवालजी। क्या मँत्री बनाए थे। जिस-जिस को जो विभाग सौंपे ,उनके कार्य मे वे इस कदर खरे उतरे कि पहले इसकी कोई मिसाल नहीं मिलती और शायद भविष्य मे भी ना मिले। जितेन्द्र तोमर को कानून मँत्री बनाया गया था।यानि जिस पर कानून कायदे बनाने की जिम्मेदारी थी,वो खुद फर्जी डिग्री लेकर वकील बनकर … Read more

पिटते रहो डॉक्टरों, वरना दीदी के हत्थे चढ़ गए तो कहीं के नहीं रहोगे!

Kolkata hospital turns into battlefield, Mamata intervenes, warns doctors तुम मार खाते रहो! गालियाँ सुनते रहो. तुम्हे हर हरीज की संभावित मौत पर अपनी कुर्बानी देने को तैयार रहना होगा. किसी मरीज की बीमारी यदि तुम्हारे कण्ट्रोल से बाहर हो जाए ते पूरे अस्पताल को ही स्वाहा करने की शक्ति और मानस बना के रखना … Read more

विपक्ष का जोश और शासक का होश …!!

तारकेश कुमार ओझा मोरली हाइ या डाउन होने का मतलब तब अपनी समझ में बिल्कुल नहीं आता था। क्योंकि जीवन की जद्दोजहद के चलते अब तक अपना मोरल हमेशा डाउन ही रहा है । लेकिन खासियत यह कि जेब में फूटी कौड़ी नहीं वाले दौर में भी यह दुनिया तब बड़ी खूबसूरत लगती थी। जी … Read more

राम्या देशद्रोही कैसे हो गई?

कन्नड़ अभिनेत्री और कांग्रेस की पूर्व विधायक राम्या के मात्र इतना कहने पर कि पाकिस्तान जहन्नुम नहीं है, उसे देशद्रोही करार देना हद्द दर्जे की गंदी राजनीति व असहिष्णुता की इंतहा है। इस मामले में होना जाना कुछ नहीं है, ये महज शब्द जुगाली है। कुछ लोगों को अपनी देश भक्ति स्थापित करने का मौका … Read more

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