स्नेह,विनम्रता,सोहार्द एवँ सच्चाई की विजय का पर्व —दशहरा के पार्ट 3

जरा सोचिये और चिन्तन-मनन कीजिये कि क्या ऐसा हो रहा है? अगर नहीं तो रावणमेघनाथ और कुमंकर्ण के पुतलों को जलाने, भव्य रामलीलायें आयोजित करने और जय श्रीराम के जयकारें बोलने का क्या औचित्य है ? क्यों हम लाखों करोड़ो रूपये पुतले बनाकर उन्हें जलाने में व्यर्थ खर्च करते हैं ? क्यों हमारे मन में … Read more

स्नेह,विनम्रता,सोहार्द एवँ सच्चाई की विजय का पर्व —दशहरा के पार्ट 2

रावण–वध के बाद स्वयं भगवान राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को रावण के पास जाकर रावण से राजनीति का गूढ़ ज्ञान प्राप्त करने का आदेश दिया था | रावण ने लक्ष्मणजी को तीन सीख दी यानि (1)शत्रु को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए | (2 )शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना चाहिए और … Read more

स्नेह,विनम्रता,सोहार्द एवँ सच्चाई की विजय का पर्व —दशहरा के पार्ट 1

काम,क्रोध,लोभ,मद,मोह,मत्सर,अहंकार,आलस्य,हिंसा, अधर्म एवं चोरी को त्याग कर स्नेह,विनम्रता,सोहार्द को अपने जीवनमें अपनाने का संकल्प लेने का पर्व ही दशहरा है |’दश’ व’ हरा’ से मिलकर दशहरा बना है | निसंदेह दशहरा का अर्थ भगवान राम के द्वारा रावण के दसों सिरों यानि दसों पापों यथा काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और … Read more

नवरात्रि –नारी सशक्तिकरण की पूजा अर्चना आराधना का पर्व Part 3

माता पार्वती, लक्ष्मी औरसरस्वती के विभिन्न नौ स्वरूपों को नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है। नवरात्रों में हम पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरूपों की पूजा-आराधना करते हैं वहीं अगलेतीन दिन में लक्ष्मी माता के तीन स्वरूपों और आखरी के तीन दिन में माता सरस्वती के तीन स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती हैं। … Read more

नवरात्रि –नारी सशक्तिकरण की पूजा अर्चना आराधना का पर्व Part 2

कष्टों, मुसीबतों, विपदाओं (काल) के हरण के प्रतीक में हम ” देवी कालरात्री” की आराधना करते हैं | शांति का संदेश वाहक सफेद रंग से सुशोभित माता “महागोरी”, “ देवी सिद्धिदात्री” ( जो जीव मात्र की सुरक्षा,देखभाल करती है वह कल्याणकारी भी है) सभी सिद्धियों को संपुष्ट करने वाली हैं | पहला नवरात्रा बालिकाओं को, … Read more

नवरात्रि –नारी सशक्तिकरण की पूजा अर्चना आराधना का पर्व Part 1

निसंदेह देश की प्रगति एवं विकास नारी के सशक्तिकरण के बिना असंम्भव है | इसी अवधारणा को मान्यता देते हुये भारत में प्राचीन काल से ही नारी को देवी तुल्य मान कर सम्मान देने की गोरवमयी परम्परा रही है | नवरात्रा के नो दिनो का पर्व हमारे समाज की इसी हमारी परम्परा की पुष्टी करता … Read more

समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी वेश्यसम्राट अग्रसेन Part 6

शासन– व्यवस्था अग्रसेनजी ने अपने राज्य को 18 बस्तियों में विभाजित कर वहां एकतंत्रीय शासनप्रणाली के स्थान पर एक नयी प्रजातांत्रिक राज्य व्यवस्थाव्यवस्था को जन्म दिया | अग्रसेनजी ने वैदिक सनातन आर्य सस्कृंति की मूल मान्यताओं को लागू कर राज्य कीपुनर्गठन में कृषि-व्यापार, उद्योग, गौपालन के विकास के साथ साथ नैतिक मूल्यों की पुनः प्रतिष्ठा … Read more

योजनाओं के केन्द्र में कौन? गरीब या सत्ता?

अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस- 17 अक्टूबर, 2020 पर विशेष कोरोना महामारी के कारण अस्तव्यस्त हुई अर्थ-व्यवस्था एवं जीवन निर्वाह के संकट से गरीबी बढ़ी है। गरीबी पहले भी अभिशाप थी लेकिन अब यह संकट और गहराया है। गरीबी केवल भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया की एक बड़ी समस्या है। दुनियाभर में फैली गरीबी के … Read more

समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी वेश्यसम्राट अग्रसेन Part 5

पशुबलि बंद करवाने वाले प्रथम सम्राट महर्षि गर्ग ने भगवान अग्रसेन को 18 पुत्रके साथ 18 यज्ञ करने का संकल्प करवाया। उन दिनो यज्ञों में पशुबलि दी जाती थी। जिस समय 18 वें यज्ञ में जीवित पशुओं की बलि देने की तय्यारी की जा रही थी उस वक्त एक घोडा बलीके लिए लाया गया | … Read more

समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी वेश्यसम्राट अग्रसेन Part 4

अग्रवालों के 18 गोत्र एवं उनका नामकरण हममें से अधिकाक्षं लोगों की मान्यता है कि अग्रवालों के 18 ( या साढ़े सत्तराह ) गोत्रो के नाम उनके 18 पुत्रों के नाम से रक्खें गये है किन्तु वास्तविकता में गोत्रो के नाम 18 यज्ञ करवाने वाले ऋषियों के नाम से है जो यह दर्शाता है कि … Read more

समाजवाद के प्रणेता अहिंसावादी वेश्यसम्राट अग्रसेन Part 3

अग्रोहा शहर का जन्म देवी महालक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त करने के बादराजा अग्रसेन ने नए राज्य की स्थापना हेतु रानी माधवी के साथ भारत का भ्रमण किया, अपनी यात्रा के दौरान वे एक जगह रुके जहाँ उन्होंने देखा कि कुछ शेर और भेडीये के बच्चे साथसाथ खेल रहे थे | राजा अग्रसेन ने रानी माधवी … Read more

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