स्नेह,विनम्रता,सोहार्द एवँ सच्चाई की विजय का पर्व —दशहरा के पार्ट 3
जरा सोचिये और चिन्तन-मनन कीजिये कि क्या ऐसा हो रहा है? अगर नहीं तो रावणमेघनाथ और कुमंकर्ण के पुतलों को जलाने, भव्य रामलीलायें आयोजित करने और जय श्रीराम के जयकारें बोलने का क्या औचित्य है ? क्यों हम लाखों करोड़ो रूपये पुतले बनाकर उन्हें जलाने में व्यर्थ खर्च करते हैं ? क्यों हमारे मन में … Read more