ऐसे रहेंगे आपके आने वाले कुछ दिन

मनुष्य का लग्न बहुत ही प्रभावी होता है, इसलिए गत्यात्मक ज्योतिष की सारी भविष्यवाणियां इसपर आधारित होती है। सूर्योदय के ग्रहों के हिसाब से ही हर लग्नवालों के हर दिन की परिस्थितियां निश्चित होती है , जानकारी रहने से उस हिसाब से कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं। आपका रूटीन सामान्य दिनों की तरह का हो … Read more

विभिन्न प्रदेशों में भिन्न-भिन्न तरीकों से मनाया जाता है होली का त्यौहार

ब्रज- मथुरा-व्रदावन की होली – यहाँ पर होली को कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है | उल्लेखनीय है कि यहाँ होली बाकी भारत में खेली जाने वाली होली से पहले खेली जाती है | होली का दिन शुरू होते ही नंदगाँव के हुरियारों की टोलियाँ बरसाने पहुँचने लगती हैं, साथ … Read more

कैसे रहेंगे आपके आने वाले कुछ दिन

मनुष्य का लग्न बहुत ही प्रभावी होता है, इसलिए गत्यात्मक ज्योतिष की सारी भविष्यवाणियां इसपर आधारित होती है। सूर्योदय के ग्रहों के हिसाब से ही हर लग्नवालों के हर दिन की परिस्थितियां निश्चित होती है , जानकारी रहने से उस हिसाब से कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं। आपका रूटीन सामान्य दिनों की तरह का हो … Read more

“ कौन तरह से तुम खेलत होली रे “

कौन तरह से तुम खेलत होली रे …. भरत व्यास के द्वारा लिखा एवं सुरों की मलिका बेगम अख्तर द्वारा गाया गया यह ” होरी ” जिसमें नायिका नायक से मीठी शिकायत करती है, फागुन में नायक के बहके हुए मन को इंगित करता है l फागुन चढ़ते हीं न केवल मानव मन अपितु सम्पूर्ण … Read more

होलाष्टक में खुशीअ जा रंग

सजे भारत में होली तकरीबन हिकइ नमूने सां मनाई वेंदी आहे। अचरज जी गाल्हि आहे, झूने जमाने में जडहिं सूचना संदेश मोकलण लाइ अजु वांङुरु तकनीकी कीन हुई, माण्हूं पखीनि जे परनि ते, लगरनि ते लिखी संदेश मोकलींदा हुआ तडहिं बि सजे भारत में हिक इ तरहां सां घणाई त्योहार मनाया वेंदा हुआ। पूजा पाठ … Read more

होली है असत्य पर सत्य की विजय का पर्व

-ललित गर्ग – भारत संस्कृति में त्योहारों एवं उत्सवों का आदि काल से ही काफी महत्व रहा है। होली भी एक ऐसा ही त्योहार है, जिसका धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं की रोशनी में होली के त्योहार का विराट् समायोजन बदलते परिवेश में विविधताओं का संगम बन गया है। … Read more

शुभ काम में नारियल चढ़ाने की परंपरा क्यों

हिंदू धर्म के ज्यादातर धार्मिक संस्कारों में नारियल का विशेष महत्व है। कोई भी व्यक्ति जब कोई नया काम शुरू करता है तो भगवान के सामने नारियल फोड़ता है। चाहे शादी हो, त्योहार हो या फिर कोई महत्वपूर्ण पूजा, पूजा की सामग्री में नारियल आवश्यक रूप से रहता है। नारियल को संस्कृत में श्रीफल के … Read more

भगवान शिव के 108 नाम

1-शिव ,2-महेश्वर,3-शम्भू, 4-पिनाकी, 5-शशिशेखर, 6-वामदेव, 7-विरूपाक्ष,  8-कपर्दी,9-नीललोहित10-शंकर,- 11-शूलपाणी, 12-खटवांगी, 13-विष्णुवल्लभ,,  14-शिपिविष्ट, 15-अंबिकानाथ,16-श्रीकण्ठ,17भक्तवत्सल, 18-भव, , 19-शर्व, 20 त्रिलोकेश, 21-शितिकण्ठ, 22-शिवाप्रिय, 23-उग्र,24-कपाली,25-कामारी,  26-सुरसूदन, 27-गंगाधर, 28-ललाटाक्ष,,29-महाकाल, 30-कृपानिधि, 31-भीम, 32-परशुहस्त, 33-मृगपाणी, 34-जटाधर,35कैलाशवासी 36-कवची, 37-कठोर,38-त्रिपुरांतक, 39-वृषांक,40-वृषभारूढ़, 41-भस्मोद्धूलितविग्रह, 42 सामप्रिय, 43-स्वरमयी, 44-त्रयीमूर्ति, 45-अनीश्वर,  46-सर्वज्ञ,47-परमात्मा,  48-सोमसूर्याग्निलोचन 49-हवि – 50-यज्ञमय, 51-सोम, 52-पंचवक्त्र , 53-सदाशिव,54-विश्वेश्वर, 55-वीरभद्र, 56-गणनाथ, 57-प्रजापति 58 हिरण्यरेता, 59-दुर्धुर्ष, 60-गिरीश, 61-गिरिश्वर, 62-अनघ, 63-भुजंगभूषण, 64-भर्ग, 65-गिरिधन्वा, 66-गिरिप्रिय  67-कृत्तिवासा, 68-पुराराति, 69-भगवान्, 70-प्रमथाधिप, 71-मृत्युंजय, 72-सूक्ष्मतनु, 73-जगद्व्यापी, 74-जगद्गुरू, 75-व्योमकेश, 76-महासेनजनक, 77-चारुविक्रम,78-रूद्र, 79-भूतपति, 80-स्थाणु, 81-अहिर्बुध्न्य, 82दिगम्बर, 83-अष्टमूर्ति, 84-अनेकात्मा,,85-सात्त्विक, 86-शुद्धविग्रह, 87-शाश्वत, 88-खण्डपरशु, 89-अज, 90-पाशविमोचन,91-मृड, 92-पशुपति, 93-देव, 94-महादेव, 95-अव्यय, 96 –हरि,97-पूषदन्तभित्, 98-अव्यग्र, 99-दक्षाध्वरहर,  100-हर, 101-भगनेत्रभिद्, 102-अव्यक्त, 103-सहस्राक्ष,104-सहस्रपाद, 105-अपवर्गप्रद, 106-अनंत  107-तारक,और 108-परमेश्वर | डा. जे. के. गर्ग सन्दर्भ—वेब इंडिया

22 तक न करें ये 5 काम

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले शुभ-अशुभ मुहूर्त के बारे में विचार किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार कुछ नक्षत्र स्वयंसिद्ध होते हैं यानी इन नक्षत्रों में शुभ कार्य करना बहुत ही अच्छा रहता है, वहीं कुछ नक्षत्रों में कोई कार्य विशेष वर्जित माने गए हैं। धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद … Read more

शिव महादेव क्यों हैं?

बड़ा या महान बनने के लिए त्याग, तपस्या, धीरज, उदारता और सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। विष को अपने भीतर ही सहेजकर आश्रितों के लिए अमृत देने वाले होने से और विरोधों, विषमताओं को भी संतुलित रखते हुए एक परिवार बनाए रखने का सामर्थ्य रखने वाले शिव ही महादेव हैं। शिवजी के समीप पार्वतीजी का … Read more

शिव और शंकर में अंतर

लोगों में शिव और शंकर को लेकर काफी भ्रम की स्थिति है। इसे हर किसी को समझने की जरूरत है। इसे समझने के बाद ही श्रद्धालुओं को उसके अनुरूप ही पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करना चाहिए। ऐसे समझें शिव और शंकर को शिव ज्योति बिंदु है, जबकि शंकर का शारीरिक आकार है। शिव परमात्मा … Read more

error: Content is protected !!