शुक्रवार को करें शुक्र को प्रसन्न

आज 5 अप्रेल 2019 यानी शुक्रवार का दिन है। ज्योतिष में शुक्र को वैवाहिक सुख, भोग-विलास, सौंदर्य आदि का कारक माना गया है। वहीं इसे कुंडली में 9वां भाव का स्वामी माना जाता है। शुक्र को राक्षसों का गुरु माना गया है। इसका रत्न हीरा होता है। कुंडली के हर भाव पर शुक्र का अलग अलग प्रभाव माना गया है। इस दिन की कारक देवी मां लक्ष्मी हैं, वहीं इस दिन मां दुर्गा की पूजा अर्चना का भी विधान है।

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को भौतिक, शारीरिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसलिए ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना जाता है।

शुक्र का अन्य राशियों से संबंध…
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शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है और मीन इसकी उच्च राशि है, जबकि कन्या इसकी नीच राशि कहलाती है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं और तथा सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं।

शुक्र का जातक पर प्रभाव:
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कुंडली में ताकतवर शुक्र व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को सुखी बनाता है। यह जातकों के जीवन में रोमांस में वृद्धि करता है। मजबूत शुक्र जातक के जीवन में भौतिक सुखों का आनंद लेता है।

वहीं इसके ठीक विपरीत पीड़ित शुक्र के कारण व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं। व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता आती है, मान्यता है कि यदि जन्म कुंडली में शुक्र कमज़ोर होता है तो जातक को कई प्रकार की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।

शुक्र का वैदिक मंत्र
ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।

शुक्र का तांत्रिक मंत्र
ॐ शुं शुक्राय नमः।।

शुक्र का बीज मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः।।

शादीशुदा जीवन रहेगा खुशियों से भरा, बस शुक्र ग्रह को रखना होगा प्रसन्‍न
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भोग, आनंद और ऐश्‍वर्य के साथ बिताना चाहते हैं वैवाहिक जीवन, तो करें ये उपाय
ज्‍योतिष विज्ञान के अनुसार, शुक्र को पति-पत्नि, प्रेम संबंध, ऐश्वर्य, आनंद आदि का कारक ग्रह माना गया है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी है तो आपका पूरा जीवन भोग, आनंद और ऐश्वर्य के साथ बीतता है। साथ ही दाम्पत्य जीवन सुख और प्रेम से भर जाता है। मगर शुक्र का विपरीत प्रभाव होने पर दांपत्‍य जीवन में तनाव पैदा होने लगता है। इन उपायों को आजमाकर आप अपने शुक्र को खुश रख सकते हैं…

शुक्र की वस्‍तुओं से स्‍नान
शुक्र की वस्‍तुओं से स्‍नान करने से इस ग्रह के प्रभाव को दूर किया जा सकता है। बड़ी इलाइची को पानी में डालकर उबालकर इस जल से स्‍नान करने से रूप, सौंदर्य में भी निखार आता है और शुक्र ग्रह के प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

शुक्र की वस्‍तुओं का दान
चूंकि शुक्र को भोग विलास का कारक माना जाता है। इसलिए सुख आराम की वस्‍तुओं का भी दान किया जा सकता है। महिलाएं सुखी दांपत्‍य जीवन के लिए श्रृंगार का सामान अन्‍य महिलाओं को दान करके लाभ प्राप्‍त कर सकती हैं।

शुक्र के मंत्र का करें जप
“ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा ”

शुक्र के अशुभ गोचर की अवधि या फिर शुक्र की दशा में इस श्लोक का पाठ प्रतिदिन या फिर शुक्रवार के दिन करने पर इस समय के अशुभ फलों में कमी होने की संभावना बनती है। मुंह के अशुद्ध होने पर मंत्र का जप नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर विपरीत फल प्राप्त हो सकते है। इस मंत्र से वैवाहिक जीवन की परेशानियां भी दूर होती हैं।

शुक्र ग्रह का रत्‍न धारण कर पा सकते हैं लाभ

हीरा अथवा जरकिन, श्‍वेत पुखराज,
सफेद मूंगा। इन सभी रत्‍नों को चांदी में अन्‍य किसी श्‍वेत धातु में तर्जनी उंगली में धारण किया जा सकता है। ऐसा करने से शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव को खत्‍म किया जा सकता है।

राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076, 7976009175
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