जानिये शिवलिंग मंदिरों में बाहर क्यों होता है ?

डा. जे.के.गर्ग
निसंदेह भोले नाथ जन साधारण के देवता हैं, इसीलिए वों वहां रहते हैं जहाँ छोटे बड़े, जवान बुजुर्ग आसानी से पहुंच सके | इसी मान्यता के कारण शिवलिंग को मन्दिरों में बाहर ही स्थापित किया जाता है जिससे बच्चे बूढे जवान जो भी जाए छूकर, गले मिल कर या फिर पैरों में पड़कर अपना दुखड़ा सुना कर हल्के हो सकते हैं। | इसी वजह से शिवजी अकेले ही वो देव हैं जो गर्भ गृह में भक्तों को दूर से ही दर्शन देते हैं | शिवजी को भोग लगाने और अर्पण करने के लिए कुछ भी नहीं हो तो भक्त उन्हें पत्ता, फूल, या अंजलि भर के भोले नाथ को खुश कर सकता और उनकी पूजा अर्चना कर सकता है |

जानिये शिव महादेव क्यों हैं?

बड़ा या महान बनने के लिए त्याग, तपस्या, धीरज, उदारता और सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। विष को अपने भीतर ही सहेज कर आश्रितों के लिए अमृत देने वाले होने से एवं विरोधों, विषमताओं के मध्य संतुलन रखते हुए अपने विशालकाय परिवार को एक बना रखने की शक्ति रखने वाले शिव ही महादेव हैं।

आईये जाने शिवलिंग क्या है ?

शिवलिंग का अर्थ होता है शुभ प्रतीक का बीज | शिव की स्थापना लिंग रूप में की जाती है,वही बीज क्रमश: विकसित होता हुआ सारे जीवन को आवृत्त कर लेता है | सच्चाई तो यही है कि वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनंत ब्रह्माण्ड की अक्स ही लिंग है। इसीलिए इसका आदि और अन्त को जानने का सामर्थ्य साधारण जनों में नहीं है यहाँ तक कि देवताओं के लिए भी यह अज्ञात ही है । सौरमण्डल के ग्रहों के घूमने की कक्ष ही शिवजी के तन पर लिपटे सांप हैं।

सकंलनकर्ता——डा.जे.के.गर्ग

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