बही-खातों की तरह सोचे वैश्य समाज के कर्णधार
——–राजेन्द्र याग्निक—– वैश्य समाज अपने बही,-खातों के बारे में बहुत गहनता से सोचता है। होना भी चाहिए व्यापार में जो नुकसान दे उससे वैश्य समाज दूर रहता है। पिछले दिनों समाज के कर्णधारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान कर कि यदि भाजपा और कांग्रेस में से किसी ने भी जिले में एक टिकट भी … Read more