*तृणमूल की बिखरी पत्तियां*
*फूलों का बिखरना तो तय था लेकिन* *कुछ इसमें हवाओ की सियासत बहुत थी* *ममता बनर्जी की तृणमूल या फूल की पत्तियां के बिखरने पर परवीन शाकिर का उक्त शे’र कुछ इस तरह मानस में कौंधता है गोया शायरा ने इसी मौके के लिए यह कहा हो।* *ममता के साथ जो क्या … Read more