न्याय व्यवस्था पर एक सवाल

दोस्तों, आज एक सवाल, जो जनचर्चा में है। निचली अदालत के फैसले को जब सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से गलत ठहरा देता है तो प्राथमिक स्तर पर कडा फैसला करने वाले को क्या आर्थिक या अन्य किस्म का दंड देने वाले का प्रावधान नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसके फैसले से खामियाजा भुगतने वाले ने जो … Read more

लो अब सीमा को चुनाव भी लडवाया जा रहा है

हम दुनिया में वाकई अजीबोगरीब लोकतांत्रिक लोग हैं। जिसके अवैध रूप से भारत में आ जाने की जांच चल रही है, जिसके फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले में दो जने गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जिसको भारत की नागरिकता मिलना तो अभी बहुत दूर की बात है, उसे हम फिल्म में हीरोइन बनाने की … Read more

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की स्कूलिंग में बहुत फर्क है

प्रिंट और इलैक्टोनिक मीडिया की कार्यप्रणाली व सोच में कितना अंतर है, भाशा की मर्यादा में कितना फर्क है, इसका अंदाजा आप वरिश्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग, एन के सिंह, अनिल लोढा जैसे प्रिंट बेस्ड पत्रकारों के विष्लेशण को सुन कर कर सकते हैं। वे कितना संतुलित बोलते हैं। निश्पक्ष बने रहने का पूरा ख्याल रखते … Read more

सीमा हैदर को लेकर अनाप शनाप बकवास

प्रिंट और इलैक्टॉनिक मीडिया में यूं तो मौलिक रूप से बहुत फर्क है, मगर षीर्शक के मामले में और भारी अंतर है। प्रिंट में कंटैंट का कम से कम षब्दों में सटीक हैडिंग लगाने की परंपरा रही है। हालांकि अब स्टाइलिष हैडिग भी लगाए जाने लगे हैं, मगर टीवी चैनल और यूट्यूब वीडियो में हैडिेग … Read more

राजस्थान में कोचिंग संस्थान के छात्र छात्राओं की आत्महत्याऐ और राजनीतिक दल और मीडिया का मौन

आखिर कब तक होती रहेगी आत्महत्याएं ? आज 9 फरवरी को फिर अखबारों में खबर आई कि शिक्षा नगरी कोटा के ऐलन कोचिंग सेंटर की छात्रा ने चोथी मंजिल की छत से कूद कर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का दस दिन में यह तीसरा मामला है। आखिर कब तक ऐसा होता रहेगा ? अच्छी तथा … Read more

अमृत की राह में बड़ा रोड़ा है भ्रष्टाचार

नरेन्द्र मोदी शासन के जिम्मेदारी भरे बजट-2023 ने समावेशी आर्थिक समृद्धि और वैश्विक महत्वाकांक्षा के साथ उस ‘नए भारत’ की नींव रखी है, जो अपनी स्वाधीनता के सौवें वर्ष में साकार होगा। यह बजट ‘अमृत काल’ को सबसे अच्छे ढंग से रेखांकित करता है। निश्चित ही सरकार की नजर अमृतकाल पर है। उसी दृष्टि से … Read more

सामाजिक ताने- बाने को कमजोर करती जातिगत कट्टरता

राजनीतिक लाभ के लिए जातिगत ध्रुवीकरण के अलावा उपरोक्त मांग के पीछे कुछ कारक सक्रिय नजर आते हैं। इस परिदृश्य में, यह कहना गलत नहीं होगा कि सामाजिक आर्थिक समानता लाने के उद्देश्य से की गई सकारात्मक कार्रवाई सत्ता हथियाने के एक उपकरण के रूप में अधिक हो गई है। जाति ने लोकतांत्रिक राजनीति के … Read more

यूपी में उभर रही है त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर

सपा-बसपा के आमने-सामने आने से भाजपा झूमी संजय सक्सेना,लखनऊ / अगले वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश की सियासत काफी तेजी से ‘रंग’ बदल रही है। कुछ पुराने मुद्दों और विवादित बयानों को नई ‘धार’ दी जा रही है तो आरक्षण, जातिगत जनगणना, रामचरित मानस विवाद वोट बटोरने के नये … Read more

देश में अमृतकाल, बजट से मालामाल या बुरे होंगे हाल

अगले वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले यह मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है. केंद्रीय बजट से आम आदमी से लेकर उद्योग जगत को भी कई उम्मीदें हैं, कोरोना महामारी के बाद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था की हालत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले बेहतर है, फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था जी 20 … Read more

एक दिन के आर्थिक विशेषज्ञ

*ओम माथुर* मेरा दावा है कि संसद और विधानसभाओं में बैठकर केंद्रीय और राज्य काक्षबजट सुनने वाले आधे से ज्यादा सांसदों,विधायकों एवं बजट आने के बाद इस पर प्रतिक्रिया पेलने वाले अधिकांश नेता बजट के बारे में कुछ नहीं समझते। लेकिन टीवी कैमरों के सामने सभी आर्थिक विशेषज्ञ बन जाते हैं। प्रतिक्रिया देना आसान भी … Read more

रटे रटाये फर्जी जुमले

सत्तापक्ष के लिए सदैव अच्छा और विपक्ष की नज़र में सदैव बुरा *बजट* अखबारों में छापनी बन्द कर देनी चाहिए प्रतिक्रिया *-अमित टंडन-* मेरा मानना यह है कि अब अखबारों को बजट से अगले दिन छापने वाले बजट प्रतिक्रया वाले पेज को बंद कर देना चाहिए। अर्थात बजट प्रतिक्रिया नहीं छापी जानी चाहिए। औचित्य क्या … Read more

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