आरक्षण की मूल भावना अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग को समाज में समानता और सम्मान दिलाने की हैं
अजमेर/बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने जब भारत का संविधान बनाया था तो उसमें स्पष्ट था की जो दलित धनाढ्य होते हुए भी छुआछूत के भेदभाव से उच्च वर्ग के पास नहीं बैठ पाते । इसलिए जब तक उन्हें आरक्षण द्वारा मजबूती प्रदान कर एक साथ उठने बैठने व भाईचारे के साथ रहने का अवसर प्रदान … Read more