मिठाणु में कौड़ाणि (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी “अरे साईं दीनानाथ कीअं आहियो?” फोन जो रिसीवर खणंदे ई दीनानाथ आवाज़ु बु॒धी। “मां मज़े में आहियां, तव्हां कीअं आहियो? बाकी काल्ह तव्हां जेका मिठाई आंदी हुई, उन जो कौड़ो सवादु मुंह में अञा ताईं आहे…” चई दीनानाथ चुपु थी वियो। “उहो कीअं? मिठाई ऐं कौड़ी, … Read more

वैचारिकी-अपने मनुष्य होने को जाने

जब कोई व्यक्ति या संघठन धर्म, जाति, नाम की आड़ में पहचान या गौरव की बात कर रहा होता है, तब वह किसी अन्य के प्रति लघुता या नफरत का भाव भी भर रहा होता है। ठीक वैसे ही जैसे अ से अनार, आ से आम सिखाते हुए ना फल दिखाया जाता है और ना … Read more

यतीम (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी रमा सोचींदी रही, पंहिंजो पाण सां खफ़े थींदी रही। कशमकशि जे समुंड में गोता खाइण लगी॒ हुई, फैसिलो करणु मुश्किल थी वियो हुअसि। घर जी चाऊंठि लछिमण रेखा वांगुर हुअसि। हिन पासे जी दुनिया में संबं॒धनि जी घुट हुई, हुन पासे जी दुनिया में पंहिंजे ढंग … Read more

बढ़ती आबादी के बीच गंभीर होती पर्यावरण चुनौतियां

संयुक्त राष्ट्र द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी 2060 के दशक में 1 अरब 70 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है, जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जा रही है, पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं गंभीर चुनौती बनती जा रही है। हमें संसाधनों के विस्तार एवं विकास की योजनाओं के बीच पर्यावरण … Read more

*कविता-आप कब डरे थे*

आपको सबसे ज़्यादा डर कब लगा था तब जब एकाएक कोई डरावना सपना देखकर जाग गए थे या तब जब नाइट शो में होरर फ़िल्म देखकर लौटे थे या तब जब आपने घर के सामने किसी मरे हुए जानवर की लाश देखी थी या तब जब पहली बार शमशान में मुर्दे को जलता हुआ देखा … Read more

ज़िन्दगी एक किताब है।

ज़िन्दगी एक खुली किताब है कितना पढें इस किताब को, थक चुका हूं अब पढ़ते-पढ़ते फिर से खोल देती है अगली पृष्ठ । मजबूरन ही पढ़ना पड़ता है ज़िन्दगी तुझे संवारने की खातिर, ऐ ज़िन्दगी तू संवरती तो नही है पर हां उम्र पल-पल ढ़़ल जाती है । ज़िन्दगी की किताब पढ़ पाना मुमकिन ही … Read more

ईश्वर-तुल्य गुरु जीवन को नया घाट देते हैं

गुरु पूर्णिमा- 21 जुलाई 2024 पर विशेष गुरु पूर्णिमा का भारतीय संस्कृति सर्वोपरि महत्व है, यह गुरु-पूजन का पर्व है। सन्मार्ग एवं सत-मार्ग पर ले जाने वाले महापुरुषों के पूजन का पर्व, जिन्होंने अपने त्याग, तपस्या, ज्ञान एवं साधना से न केवल व्यक्ति को बल्कि समाज, देश और दुनिया को भवसागर से पार उतारने की … Read more

महानगरों में बढ़ता जानलेवा प्रदूषण गंभीर चुनौती

चिकित्सा विज्ञान से जुड़ी चर्चित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका लासेंट के हाल के अध्ययन में वायु प्रदूषण की बढ़ती विनाशकारी स्थितियों के आंकड़े न केवल चौंकाने वाले है बल्कि अत्यंत चिन्तातनक है। भारत के दस बड़े शहरों में हर दिन होने वाली मौतों में सात फीसदी से अधिक का मुख्य कारण हवा में व्याप्त प्रदूषण है। वहीं … Read more

काजू किशमिश (नंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नागरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी “अरे हाणे आवाज़ु डि॒यणु बंदि बि कयो ऐं हरकतूं त बिल्कुल बंदि कयो।” चवंदे सुधा पंहिंजी बालकनीअ जी चाउंठ जे छेड़े ते लटिकियल सोनहरी पिञिरो लाथो ऐं रंधणे डां॒हुं वेई। मां रंधणे में लग॒ल डाइनिंग टेबल ते वेठे हुन जे हथां ठहियल चांहि जो मज़ो वठंदी … Read more

फिर आतंकी हमलें, सैनिकों का बलिदान व्यर्थ न जाये

लगातार जम्मू-कश्मीर में बढ़ रही आतंकी घटनाएं चिन्ता का कारण बन रही है। डोडा जिले में एक आतंकी हमले में कैप्टन समेत सेना के चार जवानों और जम्मू कश्मीर के एक पुलिसकर्मी का बलिदान अब यही दर्शा रहा है कि शांति एवं अमन की ओर लौटा जम्मू-कश्मीर एक बार फिर आतंकवादी आघातकारी घटनाओं की भेंट … Read more

“जजु” (नंंढी कहाणी)

लेखिका : देवी नगरानी अनुवाद : पदमा गोविंद मोटवानी जड॒हिं जड॒हिं इल्म ऐं बेइल्मीअ में जंगु छिड़ंदी आहे, उन हर हिक मौके ते हिक नओं सितारो रौशनु थींदो आहे। अजु॒ बि कुझु अहिड़ो ई थियो। पिकिनिक जूं तैयारियूं गर्मजोशीअ सां पूरियूं थी चुकियूं हुयूं। इहा जा॒ण हुई त शहर जा नामी ग्रामी माण्हूं शामिलि थींदा … Read more

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