क्या उम्र बढ़ाई जा सकती है?

मौत अंतिम सत्य है, यह हर आदमी जानता है, मगर मरना कोई नहीं चाहता। मौत से बचना चाहता है। रोज लोगों को मरते देखता है, मगर खुद के मरने की कल्पना तक नहीं करता। इसी से जुड़ा एक सत्य ये भी है कि हर व्यक्ति लंबी उम्र चाहता है। यही जिजीविषा उसे ऊर्जावान बनाए रखती … Read more

हमारी छाया में भी छिपे हुए हैं राज

पिछले एक ब्लॉग में हमने आइने में दिखने वाले प्रतिबिंब के बारे में चर्चा की थी कि हालांकि उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है, फिर भी उसकी महत्ता है। अब हम चर्चा कर रहे हैं छाया की। छाया अर्थात सूर्य अथवा रोशनी के सामने आने वाली वस्तु के पीछे बनने वाली आकृति की। हम यही … Read more

ईश्वर वाकई अव्याख्य है

पूरी कायनात सुव्यवस्थित तरीके से चल रही है। निश्चित रूप से यह कहीं न कहीं से संचालित हो रही है। कोई न कोई तो इसे चला ही रहा है। वह भले ही हमारी तरह कोई मानव या महामानव न हो, मगर एक केन्द्र बिंदु जरूर है, एक पावर सेंटर जरूर है, जिसके इर्द-गिर्द पूरा संसार … Read more

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग चौबीस श्री विजय कुमार शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 36 साल से सक्रिय श्री विजय कुमार शर्मा अजमेर में कदाचित पहले पत्रकार हैं, जो तब इंटरनेट का इस्तेमाल किया करते थे, जब स्थानीय पत्रकार इस बारे में कुछ नहीं जानते थे। सोशल मीडिया नेटवर्किंग पर न्यूज पोर्टल व यू ट्यूब चैनल के क्षेत्र … Read more

दर्पण में दिखाई देने वाले प्रतिबिंब का वजूद क्या है?

क्या आपने कभी सोचा है कि आइने अर्थात दर्पण में दिखाई देने वाले प्रतिबिंब का वजूद क्या है? वह आखिर है क्या? जब तक हम दर्पण के सामने खड़े रहते हैं, तब तक वह दिखाई देता है और हटते ही वह भी हट जाता है। तो जो दिखाई दे रहा था, वह क्या था? हटते … Read more

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग तेईस श्री गजानन महतपुरकर यह नाम नई पीढ़ी के पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों, कवियों व राजनीतिज्ञों के लिए नया हो सकता है। वजह ये कि सन् 1989 में ही अजमेर शहर से प्रस्थान कर लिया था। लेकिन इससे पहले के जागरूक लोगों के लिए यह शख्स भलीभांति सुरपरिचित रहा है। अजमेर शहर में 16 मई, … Read more

क्या अंतर्ध्यान, अदृश्य या गायब होना संभव है?

अंतर्ध्यान शब्द के मायने है, अदृश्य होना। इसका उल्लेख आपने शास्त्रों, पुराणों आदि में सुना होगा। अनेक देवी-देवताओं, महामानवों व ऋषि-मुनियों से जुड़े प्रसंगों में इसका विवरण है कि वे आह्वान करने पर प्रकट भी होते हैं, साक्षात दिखाई देते हैं और अंतध्र्यान भी हो जाते हैं। मौजूदा वैज्ञानिक युग में यह वाकई अविश्वनीय है। … Read more

आशंका संकट को न्यौता देती है?

हाल ही बेहद जीवट वाली पत्रकार श्रीमती राशिका महर्षि से चर्चा के दौरान एक विषय निकल कर आया। वो ये कि आदमी को आशंका में नहीं जीना चाहिए। आशंका में जीने से हम जिस भी बात की आशंका कर रहे होते हैं, वह घटित हो सकती है। इसके विपरीत यदि हम अपरिहार्य आशंकित स्थिति में … Read more

मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है?

मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है? यह सवाल मेरे जेहन में अरसे से है। इसका जवाब जानने की बहुत कोशिश की, मगर अब तक उसका ठीक ठीक कारण नहीं जान पाया हूं। भले ही आज वास्तविक कारण का हमें पता न हो, मगर यह परंपरा जरूर कोई … Read more

ज्यादा जीने की इच्छा क्यों? जी भी लिए तो क्या हो जाएगा?

एक शब्द है जिजीविषा। इसका अर्थ होता है जीने की इच्छा। हर आदमी अधिक से अधिक जीना चाहता है। इसके पीछे मोटे तौर पर ये इच्छाएं हो सकती हैं कि बेटे-बेटियां पढ़-लिख कर कमाने योग्य हो जाएं, उनकी शादी हो जाए, वंश वृद्धि हो, पोते-पोती देखें। और अगर पड़ पोते-पड़ पोतियां देख लें तो कहने … Read more

भगवान के दाढ़ी-मूंछ क्यों नहीं है?

आपने देखा होगा कि देवी-देवताओं से इतर जितने भी महामानव हुए हैं, जिन्हें कि हम भगवान मानते हैं, उनके चित्रों व मूर्तियों में चेहरों पर दाढ़ी-मूंछ नहीं होती। इसमें भी किंचित अपवाद हो सकता है, मगर क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? इस गुत्थी को समझने से पहले ये भी समझना होगा … Read more

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